ऊटी/तामिलनाडु: 12 मार्च 2025 (भूषण )
भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वाली रायपुर की प्रसिद्ध नृत्य गुरु श्रीमती मुञ्जेटी वरालक्ष्मी को ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी द्वारा मानद डॉक्टरेट डिग्री प्रदान की गई। उन्हें यह सम्मान “डॉक्टर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स इन भारतनाट्यम एंड कुचिपुड़ी डांसेस” के रूप में 9 मार्च 2025 को ऊटी में आयोजित एक भव्य दीक्षांत समारोह में दिया गया।
कौन हैं श्रीमति वरालक्ष्मी?
श्रीमती वरालक्ष्मी ओम श्री नटराज नृत्य निकेतन, रायपुर की निदेशक हैं और पिछले दो दशकों से हजारों छात्रों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा दे रही हैं। उनकी नृत्य कला और समर्पण के कारण उन्हें “टेरप्सिकोरियन – नृत्य की देवी” की उपाधि भी प्राप्त हुई है।
नृत्य साधना की यात्रा
श्रीमती मुञ्जेटी वरालक्ष्मी का जन्म आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के राजमुंद्री में हुआ। उन्होंने भारतनाट्यम की शिक्षा गुरु सपा दुर्गा प्रसाद से और कुचिपुड़ी नृत्य की शिक्षा गुरु पासुमर्थी श्रीनिवासुलु से प्राप्त की। नृत्य के प्रति उनके जुनून ने उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ निरंतर अभ्यास के लिए प्रेरित किया। उन्होंने वाणिज्य में स्नातक डिग्री प्राप्त की और एनसीसी जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय रहीं।
उनकी नृत्य कला ने भारत और विदेशों में प्रतिष्ठित मंचों पर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उनकी उत्कृष्ट कला के लिए उन्हें कला आचार्य, नृत्य कला शिखामणि, नर्तन विपांची, नाट्य श्रोमणी सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए।
रायपुर में नृत्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना
श्री मुञ्जेटी वरालक्ष्मी ने श्री एम. राजेशेखर से विवाह के बाद रायपुर को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने यहां छात्रों को भारतनाट्यम और कुचिपुड़ी की शिक्षा देना शुरू किया। इसके अलावा, उन्होंने आंध्र संघ के श्री बालाजी विद्या मंदिर में भी एक नृत्य प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया, जिससे कई युवा प्रतिभाएँ उभरकर सामने आईं।
मानद डॉक्टरेट सम्मान – एक ऐतिहासिक उपलब्धि
ऊटी में आयोजित इस भव्य दीक्षांत समारोह में उन्हें ग्लोबल ह्यूमन पीस यूनिवर्सिटी के कुलपति और वरिष्ठ सदस्यों द्वारा मानद डॉक्टरेट डिग्री प्रदान की गई। इस अवसर पर भारत और विदेशों से आए कई प्रतिष्ठित अतिथि और डॉक्टरेट प्राप्तकर्ता उपस्थित थे। समारोह में विशेष आमंत्रित कलाकार के रूप में श्रीमती वरालक्ष्मी ने अपनी नृत्य प्रस्तुति दी, जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनके लयबद्ध पांव ताल, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और सधे हुए नृत्य कौशल ने दर्शकों को सम्मोहित कर दिया। उनकी इस उपलब्धि से रायपुर, आंध्र समुदाय और समूचा राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
श्रीमती वरालक्ष्मी का यह सम्मान भारतीय पारंपरिक नृत्य कला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में उनके समर्पित योगदान की मान्यता है। उनकी यह उपलब्धि निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों को नृत्य साधना के लिए प्रेरित करेगी।
(www.swatantrachhattisgarh.com)