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Saturday, March 28, 2026

छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: धान नीलामी पर सियासी घमासान…

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रायपुर: 11 मार्च 2025 (sc टीम)

छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र जारी है और इसके 11वें दिन सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार के खिलाफ स्थगन प्रस्ताव लाकर 40 लाख मीट्रिक टन धान की नीलामी पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस कदम से सरकार को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का घाटा होगा।

धान नीलामी पर क्यों विवाद?

छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां धान की खरीद और भंडारण सरकार की प्रमुख नीतियों में शामिल है। राज्य सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदती है, जिसे या तो केंद्रीय पूल में जमा किया जाता है या फिर राज्य स्तर पर उपयोग किया जाता है। लेकिन इस बार सरकार 40 लाख मीट्रिक टन धान नीलाम करने की तैयारी में है, जिससे विपक्ष को आपत्ति है।

विपक्ष का कहना है कि यदि राज्य की कांग्रेस सरकार के समय ऐसा नहीं हुआ, तो अब डबल इंजन सरकार के बावजूद यह स्थिति क्यों आई? कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सदन में सवाल उठाते हुए कहा,
“जब पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, तो वहां धान नीलामी की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन छत्तीसगढ़ में यह स्थिति क्यों?” उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को केंद्रीय पूल में चावल जमा कराने का प्रयास करना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार खुद स्वीकार कर चुकी है कि 47 लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा,
“यह सच है और इसे सरकार को मान लेना चाहिए।”

सरकार का पक्ष क्या है?

विधानसभा अध्यक्ष ने जब स्थगन प्रस्ताव पढ़कर सुनाया तो मंत्री ने सरकार की तरफ से जवाब दिया। उनका कहना था कि धान भंडारण की समस्या के कारण नीलामी जरूरी हो गई है। सरकार का दावा है कि यह फैसला किसानों के हित में लिया गया है और इससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

हालांकि, विपक्ष इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ और नारेबाजी करते हुए गर्भगृह की ओर बढ़ गया। सभी 34 विपक्षी विधायक स्वतः निलंबित कर दिए गए, लेकिन बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने निलंबन रद्द कर दिया और कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।

आगे क्या होगा?

धान नीलामी का मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। विपक्ष इसे किसानों के नुकसान से जोड़ रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक मजबूरी बता रही है। अब देखना होगा कि इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है और सरकार विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है।

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