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भिलाई नगर निगम के पार्षद की गिरफ्तारी: सरकारी भूमि कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के खेल का खुलासा…

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भिलाई: 11 मार्च 2025 (sc टीम )

भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 34 के पार्षद संतोष नाथ उर्फ जलंधर को वैशाली नगर पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोप है कि उन्होंने सरकारी और निजी भूमि पर कब्जा कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इन जमीनों की रजिस्ट्री अपने व तीन अन्य लोगों के नाम पर करा ली। यह मामला प्रशासन की सतर्कता और कानून के सख्त रुख को दर्शाता है, जो ऐसे फर्जीवाड़ों को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वैशाली नगर पुलिस के अनुसार, प्रार्थी देवनाथ गुप्ता (43) ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि कोहका वार्ड नंबर 14 बाबादीप सिंह नगर स्थित खसरा नंबर 5407/4 और 5407/3 की करीब 3500 वर्गफुट जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे धोखाधड़ी की गई। इस मामले में कार्तिक नंद शर्मा, पुरुषोत्तम उर्फ अरविंद भाई, राजेंद्र सोनी और हरिश राठौर सहित कई लोगों की संलिप्तता सामने आई है।

जांच में पता चला कि आरोपी संतोष नाथ उर्फ जलंधर ने ब्रिज बिहारी और एन. धनराजु के साथ मिलकर शासकीय भूमि को उद्योग विभाग की और एक अन्य भूमि को अरविंद भाई की बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इतना ही नहीं, रजिस्ट्री के दौरान फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर एक अन्य व्यक्ति को अरविंद भाई के रूप में खड़ा किया गया और हरिश राठौर के नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी संबंधी कागजात तैयार किए गए।

फर्जीवाड़े की साजिश और सबूत:

इस पूरे मामले में आरोपियों ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर यह साबित करने की कोशिश की कि उक्त भूमि निजी स्वामित्व वाली है। इसके लिए फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस, जाली रजिस्ट्री और फर्जी विक्रेता का इस्तेमाल किया गया। रजिस्ट्री में दर्शाई गई रकम का वास्तव में कोई लेन-देन नहीं हुआ, बल्कि सिर्फ इसे कानूनी रूप देने और फर्जीवाड़े से बचने के लिए दस्तावेजों में झूठे आंकड़े जोड़े गए थे।

जांच के दौरान पुलिस को मजबूत सबूत मिले, जिससे संतोष नाथ को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए कूटरचना), 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) और 120-बी (षड्यंत्र) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई:

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी जितेंद्र शुक्ला, एएसपी सुखनंदन राठौर और सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के निर्देशन में जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को रियल एस्टेट रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना होगा। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड को और अधिक सख्ती से लागू करना, रजिस्ट्री प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य करना और सरकारी जमीनों की नियमित जांच करना जरूरी होगा।

यह मामला न केवल भिलाई नगर निगम बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की कमजोरियों को उजागर करता है। जब एक निर्वाचित प्रतिनिधि ही सरकारी भूमि पर कब्जा कर फर्जीवाड़ा कर सकता है, तो यह आम नागरिकों के लिए एक चिंता का विषय बन जाता है। इस मामले में पुलिस की तत्परता से एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या इस तरह के अन्य मामले अभी भी पर्दे के पीछे चल रहे हैं?

आम जनता और प्रशासन को सतर्क रहकर ऐसे मामलों की पहचान करनी होगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

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