छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन जल जीवन मिशन और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कार्यों में गड़बड़ी का मामला उठाया गया। इस दौरान भाजपा विधायकों ने सदन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कई जांचों की मांग उठाई।
बिल्हा से भाजपा के वरिष्ठ विधायक धरमलाल कौशिक ने जल जीवन मिशन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि बीते दो सालों में कई ठेकेदारों ने फर्जी दस्तावेज से काम हथियाये हैं। PHE मंत्री अरुण साव ने सदन में स्वीकार किया कि, फर्जी दस्तावेज के आधार टेंडर हासिल करने की शिकायतें मिली हैं। साव ने कहा – प्रारंभिक जांच की जा रही है, जांच के बाद हाई पावर कमेटी कार्यवाही का निर्णय लेगी।
मंत्री के इस जवाब पर कौशिक ने कहा- इसमें बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है, जांच होने के बजाय अपात्र ठेकेदारों को पेमेंट अधिकारियों ने कर दिया। यह ED स्तर की जांच का विषय है। कौशिक ने इसकी ED से जांच कराने की मांग रखी। तब PHE मंत्री अरुण साव ने कहा- इसमें जांच जारी है। जल जीवन मिशन में गड़बड़ी करने वालों पर कठोर से कठोर कार्यवाही की जाएगी।
प्रश्नकाल के दौरान स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का मुद्दा भी गरमा गया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने बूढ़ा तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि विभिन्न मदों से कितनी राशि खर्च हुई। नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बताया कि सभी कार्य स्मार्ट सिटी के लिए आवंटित राशि से पूरे किए गए हैं।
इसी के बाद प्रश्नकाल के दौरान स्मार्ट सिटी के कार्यों का मुद्दा भी उठा। सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने मंत्री अरुण साव को सदन में घेरा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने बूढ़ा तालाब में सौंदर्यीकरण का मुद्दा उठाया। जवाब देते वक्त घिरे नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव। अजय चंद्राकर पूछा- किस-किस मद से राशि खर्च हुई। मंत्री अरुण साव का जवाब- सभी कार्य स्मार्ट सिटी के लिए मिले पैसों से हुआ है।
इस पर चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी, पर्यटन मंडल और नगर निगम तीनों की अलग-अलग राशि इसमें खर्च हुई है और इसकी जांच होनी चाहिए। जवाब में मंत्री अरुण साव ने परीक्षण कराने का आश्वासन दिया।
इसके बाद भाजपा विधायक राजेश मूणत ने कहा- तीन-तीन एजेंसियों ने काम किया है। 6 करोड़ का फाउंटेन लगाया, लेकिन बंद पड़ा हुआ है। यह कब तक चालू कर लेंगे। इस पर सुनील सोनी ने कहा- कांग्रेस ने अनियमितताओ का भंडार दिया है। हालत यह थी कि, निकायों में टोटी लगाने के पैसे नहीं थे। सुनील सोनी ने स्मार्ट सिटी के कार्यों की जांच की मांग की।
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