छत्तीसगढ़ पुलिस की डायल-112 चलाएगी एंबुलेंस कंपनी,ZHL को 138 करोड़ अधिक में ठेका देने की तैयारी, राजस्थान CBI में दर्ज है केस…

रायपुर: 18 अगस्त 2024 (स्वतंत्र छत्तीसगढ़ )

छत्तीसगढ़ डायल-112 में टेंडर का बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस के कुछ अधिकारियों ने मिलकर एक ऐसी कंपनी को काम देने की तैयारी है, जिसके खिलाफ राजस्थान CBI में केस दर्ज है। इसके अलावा मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में 70 से अधिक मामले लंबित चल रहे हैं।

यही नहीं आईटी सेक्टर में काम करने वाले सरकार के उपक्रम टेलीकम्यूनिकेशन कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) को बाहर कर जिग्टजा हेल्थकेयर लिमिटेड (ZHL) को 138 करोड़ रुपए अधिक में देने की तैयारी है। पिछले हफ्ते डायल-112 के प्राइज विड खुलने के बाद यह बातें सामने आई।

गृहमंत्री विजय शर्मा से लेकर ED तक से शिकायत

इस टेंडर के लिए पांच कंपनियों ने पार्टिसिपेट किया था, जिसमें से TCIL और बीवीजी को टेक्निकल में बाहर कर दिया गया। बची तीन कंपनियों में सबसे कम रेट ZHL के खुले।​ अब इसकी शिकायत गृहमंत्री विजय शर्मा से लेकर ED तक में की गई है।

टेंडर डालने का अं​तिम समय भी 2 घंटे बढ़ाया

शिकायत में यह दावा किया गया है कि अफसरों ने पहले ही तय कर लिया था कि काम ZHL को देना है। यही वजह है कि टेंडर डालने का अं​तिम समय भी 2 घंटे बढ़ाया गया। इस दौरान केवल ZHL और बीवीजी ने ही टेंडर डाला।

शिकायत होने के बाद अब अफसर आनन-फानन में वर्क ऑर्डर देने की तैयारी में है। वहीं पीएचक्यू के अफसरों का कहना है कि अभी तो टेंडर प्रक्रिया चल रही है। हम प्रस्ताव बनाकर शासन को देंगे। अनुमोदन के बाद ही कंपनी को काम मिलेगा।

दूसरे राज्यों से दोगुना कीमत दे रही सरकार

वर्तमान में एक वाहन पर पुलिस विभाग 1 लाख 85 हजार रुपए दे रहा है। जबकि राजस्थान में यही काम 67000 रुपए में ही हो रहा है। यही नहीं छत्तीसगढ़ में वाहन सरकार खरीद के दे रही है और राजस्थान में कंपनी को खरीदकर लगाना होता है।

छत्तीसगढ़ में बह रही उल्टी हवा

डायल 112 के लिए छत्तीसगढ़ में निकाले गए टेंडर में 80 फीसदी हिस्सेदारी आईटी और 20 फीसदी वाहन के खर्च पर है। यानी 1 लाख 85 हजार में 80 प्रतिशत हिस्सा आईटी के नाम पर भुगतान किया जा रहा है। बाकी ड्राइवर की सैलरी, वाहन के मरम्मत और डीजल पर खर्च होता है।

इसी प्रकार के टेंडर में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान में 20 फीसदी आईटी और 80 प्रतिशत खर्च वाहन पर किया जा रहा है। यही वजह है कि इन राज्यों में रेट कम है।

कहीं कोई साजिश तो नहीं

टेंडर में एक शर्त थी कि 75 करोड़ का एक टेक्निकल काम होना चाहिए। टीसीआईएल को इस वजह से बाहर किया गया क्योंकि उन्होंने वर्क ऑर्डर नहीं लगाया था। जबकि जेएडएचएल के पास भी ऐसा कोई वर्क ऑर्डर नहीं है। उसको सीए सर्टिफिकेट के बेस पर एलिजिबल कर दिया गया।

वहीं टीसीआईएल ने 400 करोड़ का सीए सर्टिफिकेट लगा रखा था, उसके बावजूद से टेक्निकल बिड से बाहर कर दिया गया। अगर टेंडर में टीसीआईएल रहती तो काम उसे ही मिलता। कहीं ऐसा तो नहीं इसी वजह से आईटी सेक्टर में नामी सरकारी उपक्रम को आईटी क्षेत्र में ही कम अनुभव की वजह से बाहर कर दिया गया।

अपील का ऑप्शन ही नहीं

डायल 112 के लिए पांच कंपनियों ने टेंडर में पार्टिसिपेट किया था। टीसीआईएल, बीवीजी, जेडएचएल, विंध्या टेलीलिंक लिमिटेड और सीएमएस कंप्यूटर लिमिटेड। टीसीआईएल, बीवीजी को छोड़कर बाकी दोनों कंपनियों ने जेडएचएल से अधिक रेट कोट किया था। बड़ी बात यह है कि इस टेंडर में अपील का ऑप्शन भी नहीं दिया गया है।

बढ़ती गई टेंडर की डेट

डायल -112 का काम 6 साल पहले टाटा से जुड़ी एबीपी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था, इसका अनुबंध अगस्त 2023 में खत्म हो रहा था। इसलिए 12 जून 2023 को टेंडर निकाला गया, जिसकी अंतिम तिथि 12 जुलाई 2023 रखी गई। इसके बाद इस तिथि को चार बार बढ़ाया गया।

पहले 25 अगस्त फिर 26 सितंबर, 23 दिसंबर और 15 फरवरी 2024 करते हुए अंत में टेंडर निरस्त ​कर दिया गया। इसके बाद 14 मार्च 2024 को नई सरकार ने फिर टेंडर निकाला और अंतिम तिथि 4 अप्रैल रखी। इसे भी एक दिन बढ़ाया गया। 5 अप्रैल को टेक्निकल बिड ओपन की गई।

118 दिन बाद दो अगस्त को इसका इवेलुएशन हुआ और प्राइज विड में काम जेडएचएल को दे दिया गया। अगर दो दिन और देरी होती तो सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के नियमानुसार टेंडर की वैधता खुद निरस्त हो जाती।

किसको काम दिया जा रहा जानकारी नहीं- गृहमंत्री

गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पुराने टेंडर के एक्सटेंशन के लिए फाइल आई थी, फिर अफसरों ने बताया कि नए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। किसको काम दिया जा रहा है, इस​की जानकारी मुझे नहीं है।

ZHL के CEO नरेश जैन से सवाल जवाब

सवाल- क्या आपकी कंपनी के खिलाफ राजस्थान CBI में केस चल रहा है?

जवाब- हां, ZHL के खिलाफ राजस्थान CBI में एक मामला है। अभी तक इसमें कोई आरोप तय नहीं हुआ है। इस केस बाद भी हमें बिहार, केरल, पंजाब, झारखंड, UP और MP में कई काम मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मामले के लंबित होने का असर किसी भी टेंडर पर नहीं पड़ता है।

सवाल- क्या पिछले तीन साल में आपकी कंपनी को 75 करोड़ रुपए का एक काम मिला है?
जवाब- हमारा सालाना टर्न ओवर 500 करोड़ रुपए का रहा है। हमें उप्र में भी 112 का काम मिला है।
सवाल- ​​​​​​​क्या आपने अपने खिलाफ चल रही जांच के बारे में बताया है?
जवाब- हमने टेंडर की सभी शर्तों का पालन किया है। जो भी जानकारी मांगी गई है, वह प्रदान की है।

इस बार टाटा ने नहीं किया पार्टिसिपेट

डायल 112 का काम 6 साल पहले टाटा से जुड़ी एबीपी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। 4 मार्च 2024 को निकाले गए टेंडर में पांच कंपनियों ने पार्टिसिपेट किया। बीवीजी, टीसीआईएलएस, जेडएचएल, सीएमएस और बिरला ग्रुप। केवल टीसीआईएलएस को बाहर कर दिया गया, जबकि यह सरकार का उपक्रम है। यही वजह है कि इस टेंडर को लेकर कई गंभीर आरोप लग रहे है।

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