स्वतंत्र छत्तीसगढ़ :
रायपुर :
शहर की मुख्य सड़कों पर सब्जी और फुटकर की दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों को पांच साल बाद भी निगम के पौनी पसारी बाजारों में शिफ्ट नहीं किया जा सका है। इस वजह से अभी भी सड़कों पर ही बाजार लग रहा है। इन बाजारों की वजह से हर दिन ट्रैफिक जाम होता है, जिसमें हजारों लोग फंस रहे हैं। इतना ही नहीं बाजारों के कचरे की बदबू ने भी लोगों को हलाकान कर दिया है। बाजारों के आसपास की कॉलोनी वालों को इससे हर दिन दो-चार होना पड़ रहा है। इस मामले को लेकर हर तरह की शिकायत निगम कमिश्नर से मंत्री तक हो चुकी है। लेकिन आज तक बाजार पौनी पसारी की दुकानों और चबूतरों में शिफ्ट नहीं हो पाई हैं।
राज्य सरकार की ओर से करीब पांच साल पहले 2 करोड़ से ज्यादा खर्च कर भाठागांव, महोबाबाजार, नंदी चौक टिकरापारा, क्रिस्टल आर्केड के सामने शक्तिनगर, संतोषी नगर समेत करीब दस जगहों पर पौनी पसारी और हाट बाजार बनाए गए थे। इन बाजारों में सड़कों पर सब्जी, मिट्टी के सामान, सजावटी सामान, नाई, धोबी, मोची, बढ़ई, हस्तशिल्पी, दर्जी, लुहार, बंसोड, चना, मुर्रा-लाई बेचने वालों को शिफ्ट करना था। लेकिन निगम के अफसर एक भी बाजार को इन जगहों पर शिफ्ट नहीं कर पाए। इसलिए यह सभी पौनी पसारी बाजार अब खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। दुकानें शिफ्ट नहीं होने की वजह से इन सभी जगहों की सड़कों पर शाम होते ही जाम लगना शुरू हो जाता है।
महोबाबाजार पौनी पसारी जर्जर, दुकानें खाली, बाजार सड़क पर
मोहबाबाजार में ओवरब्रिज के नीचे करीब 30 लाख रुपए खर्च कर आठ हजार वर्गफीट जमीन पर पौनी पसारी बाजार बनाया गया था। इसमें 48 से ज्यादा दुकानें हैं। इन दुकानों पर इसी सड़क पर कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों को शिफ्ट करना था। लेकिन करीब पांच साल बाद एक भी दुकान अलॉट नहीं की गई। अब यह बाजार खंडहर में तब्दील हो गया है। रात में इस जगह पर असामाजिक लोगों का जमावड़ा भी लगता है। इन खाली दुकानों में जगह-जगह शराब की बोतलें बिखरी हैं। इसी सड़क पर छोटी-छोटी दुकानें लगने की वजह से महोबाबाजार से आने-जाने वाली सड़कों पर शाम में जाम की स्थिति बनीं रहती है।
टिकरापारा में एक करोड़ का बाजार खाली, लेकिन दुकानें सड़क पर ही
टिकरापारा मुख्य चौक पर निगम की ओर से 1 करोड़ से ज्यादा खर्च दो फ्लोर वाले आमने-सामने दो बाजार बनाए गए। इस बाजार में 100 से ज्यादा दुकानें और चबूतरे हैं। लेकिन आज तक एक भी दुकान किसी को भी अलॉट नहीं की गई। इस बाजार से 10 कदम की दूरी पर ही 50 से ज्यादा दुकानदार सब्जी और मछली-मटन बेच रहे हैं।
सड़क की दुकानें इस बाजार में शिफ्ट नहीं होने की वजह से दुकानें भी खंडहर होती जा रही है। शाम लगते ही यह बाजार में भीड़ लग जाती है। जिसकी वजह से टिकरापारा की सभी सड़कों पर जाम लगता है। लोगों को आने-जाने में जमकर परेशानी होती है। इतना ही नहीं बाजार का कचरा वहीं छोटी नालियों में डाल दिया जाता है, जिसकी वजह से दिनभर बदबू आती है। इससे वहां पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
भाठागांव पौनी पसारी के चबूतरे तक टूटे, लेकिन दुकानें नहीं लगीं
भाठागांव इलाके में बरसों से सड़क पर दुकान लगाने वालों के लिए 25 लाख से ज्यादा खर्च कर पौनी पसारी बाजार बनाया गया। यह दुकानों के साथ ही सब्जी बेचने वालों के लिए चबूतरे बनाए गए। लेकिन अब सभी चबूतरों में दरार पड़ चुकी है। सब्जी बेचने वाले इस बाजार के बजाय आज भी सड़क पर ही सब्जी बेच रहे हैं। इस वजह से भाठागांव के आसपास की सड़कों पर अक्सर जाम की स्थिति बनीं रहती है। वहीं इस वार्ड के लोगों का कहना है कि शाम के बाद इस जगह से महिलाएं गुजर नहीं पाती क्योंकि अंधेरा होते ही नशाखोर शराब पीकर हंगामा करने के साथ ही महिलाओं से छेड़छाड़ करते हैं।
समाधान
हर हाल में होंगे बाजार शिफ्ट
सभी जोन कमिश्नरों से रिपोर्ट लेंगे कि उनके पास कितने पौनी पसारी बाजार हैं। वहां अब तक सड़कों पर लगने वाली दुकानें शिफ्ट क्यों नहीं हो पाई। जब बाजार बनकर तैयार है तो दुकानें हर हाल में शिफ्ट होंगी। इसमें कोताही नहीं बरती जाएगी।
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