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Sunday, March 29, 2026

शिक्षा सत्र 2024-25 से बदलेगा सिलेबस:एनईपी से बदली गणित की किताब,एंशिएंट मैथ्स में ग्रेजुएशन के छात्र पढ़ेंगे ग्रहों की गति…

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रायपुर :

उच्च शिक्षा में इसी सत्र से लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होगी। ग्रेजुएशन के सिलेबस में बदलाव किए जा रहे हैं। इसके अनुसार अब मैथ्स के छात्र एंशिएंट मैथ्स भी पढेंगे। इसमें उन्हें प्राचीन भारतीय गणितज्ञों के द्वारा खोजे गए नियमों, ग्रहों की गति, काल गणना समेत अन्य की गणितीय विधियों के बारे में बताया जाएगा। छात्र बोधायन, आर्यभट्ट, वराहमिहिर, पाणिनि, कात्यायन, ब्रह्मगुप्त से लेकर रामानुजन जैसे महान व्यक्तित्व के काम से वे परिचित हो सकेंगे।

प्रदेश यह पहली बार है, जब ग्रेजुएशन में पढ़ाए जाने वाले मैथ्स में एंशिएंट मैथ्स को शामिल किया जा रहा है। प्रदेश में छह राजकीय विश्वविद्यालय हैं। इनसे संबद्ध करीब छह सौ कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में ग्रेजुएशन में गणित का सिलेबस 2025-26 से बदलेगा। इसे लेकर तैयारी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक नए सिलेबस में भारतीय गणितज्ञ और ज्योतिषाचार्य के बारे में ही नहीं बल्कि गणित के लिहाज से उनका क्या-क्या योगदान है?

कौन-कौन सी पद्धति है उसे भी बताया जाएगा। जैसे, गणित के जादूगर कहे जाने वाले श्रीनिवास रामानुजन ने बहुत से गणित समीकरण अलग-अलग तरीके से हल किए। त्रिकोणमिति में उन्हें महारत हासिल थी। बोधायन जिन्होंने समकोण त्रिभुज के बारे में बताया था, उसकी पढ़ाई कराई जाएगी।

इसी तरह बीए व बीएससी मैथ्स के पेपर को ऐसा डिजाइन किया जा रहा है कि एक साल की पढ़ाई करने के बाद छात्रों को कई तरह की जानकारी प्राप्त हो जाएगी। ताकि किसी वजह से छात्र एक साल कोर्स पूरा करने के बाद यदि पढ़ाई छोड़ते हैं, तो उन्हें आगे परेशानी न होगी। एक साल की पढ़ाई का उपयोग भी रोजगार के लिए कर सकेंगे। इसी तरह फिर दूसरे साल का सिलेबस तैयार किया जाएगा।

अभी एक साल में मैथ्स के तीन पेपर पढ़ रहे हैं

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आधार पर ग्रेजुएशन का सिलेबस तैयार किया जा रहा है। इसके अनुसार एक साल में छात्र मैथ्स के दो पेपर पढ़ेंगे। वह भी छह-छह महीने के अंतराल में, क्याेंकि यह कोर्स भी सेमेस्टर आधारित होगा। अभी ग्रेजुएशन की पढ़ाई वार्षिक प्रणाली के तहत है। इसके अनुसार एक साल में छात्र मैथ्स के तीन पेपर पढ़ते हैं। जानकारों का कहना है कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई का सिस्टम और सिलेबस बदलने से छात्रों को फायदा होगा। छह महीने में एक पेपर होने से उन पर दबाव कम होगा।

ग्रेजुएशन में अभी पढ़ते हैं मॉर्डन मैथ्स
जानकारी के मुताबिक ग्रेजुएशन लेवल पर छात्र अभी मॉर्डन मैथ्स पढ़ते हैं। इसमें विश्वभर में जो मैथ्स को लेकर चलन है, वह शामिल है। यह पूरी तरह से मैथेमेटिकल है। भारत में गणित को लेकर जो विकास हुए हैं, उसकी जानकारी नहीं है। पिछले साल मैथ्स का सिलेबस चेंज हुआ था, इसमें भी भारत के प्रमुख गणितज्ञों का उल्लेख नहीं है। अब एनईपी के अनुसार इनमें नई-नई जानकारियों को शामिल किया जा रहा है।

अन्य विषय में भी बदलाव होंगे
ग्रेजुएशन में बीए, बीकॉम, बीएससी, बीसीए समेत अन्य के सिलेबस में बदलाव किए जाएंगे। इसे लेकर तैयारी की जा रही है। इसके तहत मैथ्स ही नहीं, अन्य विषय जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, एंथ्रोपोलाॅजी, बॉटनी, बायोटेक, माइक्रोबायोलॉजी, फारेस्ट्री एंड वाइल्ड लाइफ, कंप्यूटर साइंस, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, इतिहास, लोक प्रशासन, राजनीति विज्ञान, भूगोल, गृह विज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत समेत अन्य विषयों के सिलेबस को संशोधित किया जा रहा है। इसके लिए अलग-अलग कमेटियां बनाई गई है। यह कमेटी इस महीने तक अपनी रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को सौंप देगी। माना जा रहा है कि जून में सिलेबस जारी कर दिए जाएंगे।

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