स्वतंत्र छत्तीसगढ़ :
रायगढ़ :
जिले के पूंजीपथरा औद्योगिक पार्क में उद्योगपतियों के संगठन और जिंदल प्रबंधन के बीच अरसे से चला रहा गतिरोध जारी है। बिजली की दरें बढ़ने से नुकसान के कारण कारण औद्योगिक पार्क के 50 में से 35 प्लांट महीनों से बंद हैं। इससे सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग आठ हजार लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ है। बिजली की दरों को लेकर संगठन ने कोर्ट तक लड़ाई लड़ी लेकिन वहां हार के बाद अब जिंदल प्रबंधन के साथ बात कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में हैं।
पूंजीपथरा के ओपी जिंदल औद्योगिक पार्क में लगभग 50 औद्योगिक इकाइयां लगी हुई हैं। इसमें ज्यादातर फर्नेस हैं, जहां इंगट और ब्लेड जैसे लोहे के उत्पाद बनते हैं। औद्योगिक पार्क को जिंदल प्रबंधन द्वारा ही बसाया गया था। बिजली और कोयले की डिमांड बढ़ने के बाद पिछले दो साल से औद्योगिक पार्क के उद्योगपतियों और जिंदल प्रबंधन के बीच बिजली बिल में दी जाने वाली छूट को लेकर विवाद शुरू हुआ। एसोसिएशन चाहता है कि रोलिंग मिल की अनुमति दी जाए। यदि फर्नेस के साथ रोलिंग मिल को अनुमति दी जाए तो महंगी दरों के बावजूद नुकसान से बच जाएंगे।
औद्योगिक पार्क में इकाई शुरू करने वाले उद्योगपति और जिंदल प्रबंधन के बीच शुरुआत में करार हुआ था। इसके मुताबिक प्लांट्स को सरकारी दर से 25 फीसदी सस्ती बिजली दी जानी थी। इसके साथ ही सिंगल टैरिफ की व्यवस्था थी, यानि जितनी खपत होगी उतना ही बिल देना होगा। छूट और सिंगल टैरिफ दोनों ही अब बंद हैं। अब मिनिमम चार्ज लिया जाता है, यानि जिस प्लांट ने कनेक्शन लिया है वह न्यूनतम बिल देगा, प्लांट चालू हो या बंद। वहीं सरकारी दरों के बराबर दर ली जाने लगी। प्लांट संचालकों के मुताबिक अब बिना उत्पादन के भी 10 से 12 लाख रुपए मासिक बिल देना पड़ता है।
25 फीसदी छूट के साथ सिंगल टैरिफ सिस्टम बंद
लागत कम होने के कारण इंडक्शन फर्नेस लग गए, अब खर्च बढ़ने से संकट बिजली की दरें पहले 5.44 रुपए थी, अब 5.05 रुपया हैं। यह दर अब भी सरकारी दर से एक रुपया कम है। केस में हार-जीत किसी की नहीं है। आपसी सहमति से सारे केस विड्रा कर लिए गए हैं। रायगढ़ इस्पात उद्योग संघ और जिंदल प्रबंधन के बीच कोई विवाद नहीं है। लागत कम होने के कारण इंडक्शन फर्नेस लग गए। मेटेरियल और ऑपरेशनल खर्च ज्यादा होने के कारण ऐसे प्लांट्स पर अब संकट है। सिंगल प्लांट बंद हो रहे हैं। बिलेट्स बनाने वाली यूनिट चालू हैं, क्योंकि उसकी लागत कम है, लेकिन इन पर खतरा है। ऐसे फर्नेस जिनके पास रोलिंग मिल हो, उनके लिए इकाई चलाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। -अरविंद शर्मा, पूर्व सचिव, उद्योग संघ
सालभर में 40 फीसदी बढ़ा रॉ मेटेरियल कॉस्ट औद्योगिक पार्क के एक उद्योगपति ने बताया कि फर्नेस यूनिट बिजली से ही चलती है, इसलिए बिजली बिल पर खर्च होता है। इसके साथ ही पिछले 1 साल में धीरे-धीरे कर मेटेरियल कॉस्ट लगभग 40 फीसदी बढ़ गया है। इधर बिजली पर भी खर्च बढ़ गया है। कुल मिलाकर उत्पादन करना नुकसान का सौदा है। कनेक्शन पर मिनिमम चार्ज है, इसलिए कनेक्शन सरेंडर कर दिया और इकाई बंद करनी पड़ी। बंद इकाइयों के फिलहाल शुरू होने के आसार कम हैं।
प्लांट बंद होने से दूसरे लोग भी हुए प्रभावित उद्योगपति बताते हैं कि प्लांट में काम करने वाले लोगों के अलावा ट्रांसपोर्टिंग, टेक्नीशियन ट्रेडर समेत अन्य कई लोग प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। संगठन अब इस कोशिश में है कि बिजली की दरें भले ही सरकारी बिजली जितनी हो लेकिन सिंगल टैरिफ सिस्टम लागू कर दिया जाए यानि उपयोग की गई बिजली का ही बिल देना पड़े।
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