स्वतंत्र छत्तीसगढ़ :
बिलासपुर : प्रदेश की तकरीबन सभी जेलों में क्षमता से कई गुना अधिक कैदी-बंदी हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने हत्या के मामले में 20 साल से जेल में बंद आरोपी की बेटी और माता-पिता के पत्र पर जानकारी जुटाई तो पता चला कि जेलों की कुल क्षमता 15485 है, जबकि यहां 19476 कैदी बंद हैं, यानी 3991 अधिक हैं।
354 कैदी 20 साल से जेलों में बंद हैं। इनमें से कई गंभीर रूप से बीमार हैं। वहीं, 82 मासूम अपनी मां के साथ जेलों में रह रहे हैं। हाई कोर्ट ने जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई शुरू करते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में ओपन जेल शुरू करने पर विचार करने कहा है। राज्य सरकार ने जवाब के लिए चार सप्ताह का समय लिया है। हत्या के मामले में 2010 से जेल में बंद कैदी मो. अहसान अंसारी की बेटी और उसके माता-पिता ने हाई कोर्ट को कई पत्र लिखे थे। इसमें बताया था कि उनकी अपील वर्ष 2014 से लंबित है। परिवार के एकमात्र कमाने वाले के जेल में होने की वजह से उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि हाई कोर्ट के जानकारी लेने पर पता चला कि 21 अप्रैल 2023 को उनकी अपील खारिज कर दी गई है। इधर, इस पत्र में दी गई जानकारी को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने गंभीरता से लिया और प्रदेशभर की जेलों की जानकारी मांगी।
1,843 कैदी कुशल कारीगर, 504 वरिष्ठ नागरिक
हाई कोर्ट को पता चला कि प्रदेश की जेलों की कुल क्षमता 15485 है, जबकि यहां 19476 कैदी बंद हैं, यानी 3991 अधिक। इसी तरह 1843 कैदी कुशल कारीगर हैं, जो जेल में रहते हुए काम करते हुए कमाई कर अपने परिवार की मदद कर सकते हैं। 504 वरिष्ठ नागरिक हैं। 4 कैदियों ने जेल से भागने की कोशिश की थी। वहीं, 340 कैदी ऐसे हैं, जिन्हें 20 साल से अधिक कैद की सजा सुनाई गई है। इनकी अपील भी सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई है।
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