गुरु घासीदास की शोभायात्रा में झांकी, अखाड़ा,पंथी,शोर्य के सफल अयोजन…

रायपुर/ सतनामी समाज छत्तीसगढ जिला अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ कमल कुर्रे ने बताया कि सतनाम धर्म के प्रणेता बाबा गुरु घासीदास की 267 वीं. जयंती की पूर्व संध्या पर 16 दिसंबर (शनिवार) को 50 हजार से भी अधिक लोगों की उपस्थिति में सतनामी समाज के “सात संतजन” सफेद धोती, सफेद कुर्ता व सिर पर सफेद कपड़ा बांधे हुए खुले पैर फूलों से सुसज्जित सात श्वेत ध्वज लेकर राजधानी रायपुर में शोभायात्रा का आगाज किया।


शोभायात्रा आयोजन समिति के प्रवक्ता चेतन चंदेल ने बताया कि आमापारा स्थित पवित्र जैतखाम की पूजा अर्चना व मंगल आरती के साथ संध्या 4.30 बजे शोभायात्रा प्रारंभ हुई जहां “जय- जय सतनाम” व “18 दिसंबर अमर रहे” की जयकारा लगाते हुए समाज के लोग श्वेत वस्त्र धारण कर सपरिवार शामिल हुए। शोभायात्रा का रास्ते में अनेकों राजनीतिक, धार्मिक, कर्मचारी संगठन सहित सतनामी अधिवक्ता संघ से जुड़े हुए लोगों ने पुष्प वर्षा व मिष्ठान वितरण कर जोरदार स्वागत किया।
गुरु घासीदास जी के बड़े-बड़े छायाचित्रों व जैतखाम के हुबहू मॉडल को वाहनों में फूलों व जगमग रोशनियों से सजाकर उसमें गुरु के संदेशों को अंकित किया गया था। उसी प्रकार अलग-अलग चलित झांकियां में गुरु घासीदास जी द्वारा छाता पहाड़ में तपस्या में लीन होना.. सफुरा माता को जीवन दान देना.. हाथी पर गुरु बालक दास जी को सवार होकर उपदेश देते दिखाना.. तथा पिरामिड बनाकर पंथी नृत्य की कला जैसे अनेको प्रसंगो को दिखाया गया था।

झूम-झूम के नाचोगा पंथी.. सन्ना मोर नन्ना.. सतनामी बघवा.. जैसे अनेकों पंथी गीतों में डीजे व धूमाल की धुनो पर.महिलाओं, युवतियों के साथ युवा व बच्चे जमकर नृत्यो की बौछार कर रहे थे।
अखाड़ा दलों ने दिखाई कलाबाजियां । ग्रामीण क्षेत्रो से आये हुए विभिन्न अखाड़ा दलों की टोलियों ने अपनी कलाबाजियों का शौर्य प्रदर्शन किया। उन्होंने आग के गोले छोड़ना, लाठियां भाजना, चक्र घूमाना जैसे अनेकों हुनर दिखाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
भंडारपुरीधाम से पधारे युवराज गुरु सौरभ साहेब जी राजसी वेशभूषा में बग्गी पर सवार होकर सभी का अभिवादन करते हुए शोभायात्रा के साथ चल रहे थे।


समापन स्थल गुरु घासीदास चौक (नगर घड़ी) में बनाये गये मंच पर “सात श्वेत ध्वजवाहक संतों” की पूजा अर्चना की गई तत्पश्चात सर्वश्रेष्ठ पांच झांकियो को विशेष प्रतीक चिन्ह,साल व श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। वंही अन्य झांकियो को भी सांतवना सम्मान दी गई। इस दौरान समाज के वरिष्ठजनों ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए एक स्वर में सभी को जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए गुरु के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।


शोभायात्रा में मुख्य रूप से गुरु घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी एवं आयोजन कमेटी के के अध्यक्ष के.पी. खण्डे, अहिवारा के विधायक डोमन लाल कोर्सेवाडा, डॉ.जे.आर. सोनी,सुंदर लाल लहरे, राजेंद्र भतपहरी, सुंदरलाल जोगी, एल.एल. कोसले, डी.एस.पात्रे, एस.के. सोनवानी, डॉ. भूषण लाल जांगड़े, चेतन चंदेल, डॉ. लक्ष्मण भारती, एम.डी. माहिलकर, जी. आर. बाघमारे, खेदु बंजारे, अरुण मंडल, आर.के.पाटले, प्रकाश बंदे, पं अंजोर दास बंजारे ,उतित भारद्वाज, कृपाराम चतुर्वेदी, लाला पुरेना, टिकेंद्र बघेल, अश्वनी बबलू त्रिवेंद्र, मनीष कोसरिया, नंदू मारकंडे, घासीदास कोसले, बाबा डहरिया, मानसिंह गिलहरे,कमल कुर्रे, विनोद भारती, श्याम जी टांडे ,रघुनाथ भारद्वाज, संत सारंग, सी.एल. रात्रे, जयबहादुर बंजारे, डॉ. अनिल भतपहरी, देव दीवान कुर्रे, नोहर घृतलहरे, कृष्णा बरमाल, डा. हीरामन बंजारे, आसाराम लहरे, नीलकमल आजाद, आर. के. गेंदले, बी.आर. बंजारे, डीडी. भारती ,रमेश बंजारे, संतोष महिलांग, सी एल जोशी, मोना खांडे,सुभाष कुर्रे, गिरवर जांगड़े, मनसुख घृतलहरे..
👉महिलाओं में डॉ .शकुंतला डेहरे, चंपादेवी गेंदले, उमा भतपहरी, गिरिजा पाटले, अंजली बरमाल, सुशीला सोनवानी, अमरौतिन भतपहरी, इदूं डहरिया, सुनीता देशलहरे, अनीता भतपहरी, अनीता गुरुपंच, आशा पात्रे, करुणा कुर्रे, भुवनेश्वरी डहरिया, दुलारी चतुर्वेदानी, द्रौपती जोशी, सरस्वती राघव ,डॉ. दुर्गा गेंदले, ममता कुर्रे, संगीता बालकिशोर, अर्चना कुर्रे, कीर्तन कुर्रे लक्ष्मी लहरे, मोनू बेरवंश सहित हजारों लोग उपस्थित थे।

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