बिलासपुर / छत्तीसगढ़
प्रमुख बिंदु
• हाईकोर्ट ने कहा- पिछड़ा वर्ग आयोग केवल सलाहकार एवं सिफारिश करने वाली संस्था।
• आयोग को कमर्शियल विवाद में राशि की रिकवरी का आदेश देने का अधिकार नहीं।
• हार्वेस्टर बिक्री विवाद में जारी वसूली आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर माना।
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को किसी व्यावसायिक (कमर्शियल) विवाद में धनराशि की रिकवरी का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आयोग की भूमिका केवल सलाह देने और सिफारिश करने तक सीमित है तथा वह किसी सक्षम न्यायिक या प्रशासनिक प्राधिकारी की तरह वसूली संबंधी आदेश जारी नहीं कर सकता। यह फैसला आयोग द्वारा वर्ष 2022 में जारी एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष बताया गया कि कमला मोटर्स ने 21 लाख रुपये में हार्वेस्टर बेचने का सौदा किया था, जिसके लिए 30 हजार रुपये अग्रिम लिए गए थे। बैंक फाइनेंस और कोविड-19 महामारी के कारण सौदा समय पर पूरा नहीं हो सका। बाद में वाहन उपलब्ध कराने के बावजूद खरीदार ने सौदा रद्द कर दिया और आयोग सहित अन्य अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद आयोग ने कलेक्टर को 1,26,500 रुपये की वसूली कर खरीदार को भुगतान कराने का निर्देश दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि “छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995” की धारा-9 के तहत आयोग की शक्तियां सलाह और सिफारिश तक सीमित हैं। जांच के उद्देश्य से सिविल कोर्ट जैसी कुछ शक्तियां मिलने से आयोग स्वयं सिविल कोर्ट नहीं बन जाता। कोर्ट ने माना कि हार्वेस्टर बिक्री से जुड़ा यह मामला पूरी तरह व्यावसायिक विवाद था और इसमें वसूली का आदेश देकर आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य किया। इसी आधार पर आयोग के आदेश को कानूनी दायरे से परे बताते हुए हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में रिकवरी का अधिकार केवल सक्षम प्राधिकारी के पास ही है।
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