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आज विश्व मलेरिया दिवस ….

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रायपुर : 25 अप्रैल 2023

रायपुर: हर वर्ष 25 अप्रैल को मलेरिया के खिलाफ लोगों में जागरूकता लाने के लिए विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता हैं | गौरतलब है कि हजारों लोग हर वर्ष इस जानलेवा बीमारी मलेरिया से ग्रसित होते हैं और सैकड़ों की जान भी जाती हैं | ये बात हम सभी जानते हैं कि मलेरिया मच्छरों से फैलने वाला रोग है। यह रोग मच्छरों की फीमेल प्रजाति एनोफिलीज द्वारा काटने से होता है। इस मादा मच्छर में एक खास प्रकार का जीवाणु पाया जाता है जिसे मेडिकल भाषा में प्लाज्मोडियम नाम से जाना जाता है। प्लास्मोडियम (एककोशिकीय परजीवी) की पांच प्रजातियां मनुष्यों को संक्रमित कर सकती हैं और बीमारी का कारण बन सकती हैं। प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (P falciparum), प्लास्मोडियम मलेरिया (P. malariae), प्लास्मोडियम विवैक्स (P. vivax), प्लास्मोडियम ओवले (P. ovale), प्लास्मोडियम नोलेसी (P. knowles )

मलेरिया का मच्छर सुबह या शाम को ही काटता है | दोपहर में यह निष्क्रिय रहता है जबकि दोपहर में डेंगू का मच्छर काटता है। मलेरिया प्लाजमोडियम (Plasmodium) नामक एक कोशिकीय प्रोटोजोआ जन्तु के कारण होता है तथा इसकी वाहक मादा एनाफिलीज (Female Anopheles) मच्छर होती हैं, जो कि द्वितीयक पोषद (Secondary Host) है। इससे प्रभावित होने वाला अंग प्लीहा (Spleen) है जिसमें संक्रमण से आकार बढ़ जाता है। जब संक्रमण फैलाने वाला मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो इसके लक्षण दिखने में 7 से 30 दिन तक का वक्त लगता है। लेकिन कुछ परजीवी प्रजातियों का संक्रमण लक्षण दिखने के बाद भी प्रकट नहीं होता। उदाहरण के लिए, जिस देश में मलेरिया पाया जाता है वहां जाने के एक साल बाद तक आपको बुखार हो सकता है। वहीं, यदि आप संक्रमण को रोकने के लिए दवा ले रहे हैं तो ये लंबा समय ले सकता है। वहीं, अगर आप पहले भी संक्रमण का शिकार रह चुके हैं तो आपके पास इम्यूनिटी होती है जिसकी वजह से आप मलेरिया के गंभीर लक्षणों का शिकार नहीं हो सकते या संक्रमित होने पर भी आपमें इसके सिम्टम्स नहीं दिखते। यदि आपके शरीर में दवा प्रतिरोधी परजीवी (drug-resistant parasite) हैं और आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो स्थिति जानलेवा हो सकती है। परजीवी मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) में सूजन पैदा कर सकता है, जिसे सेरेब्रल मलेरिया भी कहा जाता है।यह पलमोनरी एडिमा का कारण भी बन सकता है, जो फेफड़ों में तरल पदार्थ (accumulation of fluids) का संचय है। यह किडनी और लिवर फैलियर का कारण बन सकता है और ब्लड शुगर लेवल को भी कम कर सकता है जिससे शरीर को भयंकर नुकसान पहुंच सकता है।

मलेरिया के लक्षण : ठंड लगना, तेज बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, पसीना आना, थकान, बैचेनी होना, उल्टी आना , एनीमिया, मांसपेशियों में दर्द, ब्लडी स्टूल (मल में खून आना), आमतौर पर बीमार महसूस करना।

| कोविड का कहर पहले से जारी है और इसी बीच मानसूनी बीमारियों ने भी लोगों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इन दिनों देश के कई हिस्सों में मलेरिया बुखार से लोग परेशान हैं जिसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मलेरिया मानसून की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। वृद्ध हो या जवान, ये बुखार हर उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया बुखार ने जबरदस्त पैर पसारे हुए है। हालांकि, अच्छी बात ये भी है कि देश में मलेरिया के मामलों और उनसे होने वाली मौतों की संख्या में गिरावट आई है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में कहा कि 2015 की तुलना में 2020 में मलेरिया के मामलों में 84.4 प्रतिशत और मौतों में 83.6 प्रतिशत की कमी आई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में डेंगू से पीड़ित 99.82 प्रतिशत लोग ठीक हुए। जबकि एक सर्वे के अनुसार, साल 2016 में भारत में मलेरिया के 7,16,213 पुष्ट मामले थे और इनमें से सैकड़ों लोगों की मौत भी हुई थी। आपको ये बात दिमाग में रखनी चाहिए कि मलेरिया कोई आम बुखार नहीं है। अगर आपने इसे हल्के में लिया तो ये खतरनाक हो सकता है। यहां हम आपको मलेरिया के प्रकार और लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें आपको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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