बस्तर में शिक्षा का बड़ा बदलाव: जर्जर स्कूलों का होगा कायाकल्प, हर बच्चे को मिलेगा प्रवेश…

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जगदलपुर / छत्तीसगढ़

शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता, केंद्र-राज्य मिलकर तैयार कर रहे व्यापक योजना

मुख्य बिंदु:
बस्तर के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की तैयारी
जर्जर भवनों की मरम्मत और नए निर्माण की योजना
बच्चों को बेहतर माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
स्कूलों में संस्कार और नैतिक शिक्षा को बढ़ावा
किसी भी छात्र को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा

जगदलपुर: बस्तर की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अब विकास के साथ-साथ शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के संकेत मिल रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही हैं। सरकार का दावा है कि जर्जर स्कूल भवनों के कायाकल्प से लेकर बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने तक कई स्तरों पर काम किया जाएगा।

बस्तर संभाग के स्कूलों का मंगवाया गया ब्यौरा
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि बस्तर संभाग के सभी पूर्व माध्यमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है। जिन स्कूल भवनों की हालत खराब है, उनकी सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से मरम्मत और नए भवनों के निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

स्कूल भवनों का होगा कायाकल्प
सरकार का कहना है कि पहले भी कई स्कूलों के लिए मरम्मत मद में राशि जारी की गई थी और अब जिन संस्थानों को आवश्यकता होगी, उन्हें भी योजना में शामिल किया जाएगा। उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधारभूत सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि शिक्षा स्तर में व्यापक सुधार हो सके।

शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं
स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर चल रहे विवाद पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था जारी रहेगी। उनका कहना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और संस्कारों का विकास भी जरूरी है।

प्रवेश से कोई भी छात्र नहीं होगा वंचित
सरकारी स्कूलों में प्रवेश को लेकर आ रही शिकायतों पर मंत्री ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं किसी बच्चे को परीक्षा परिणाम या अन्य कारणों का हवाला देकर प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई होगी। सरकार की नीति स्पष्ट है कि किसी भी सरकारी स्कूल में किसी भी बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा।

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