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जिले की सौगात से क्या कांग्रेस दे पायेगी विरोधियों को मात? क्या है इस नए जिले की बुनियादी समस्या.. जानें जनकारवां में..

बालोद : 21 जुलाई 2023

इस साल के आखिर में छत्तीसगढ़ समेत मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है। ऐसे में आम मतदाता चुनावों को लेकर कितनी तैयार है? अपने जनप्रतिनधियों और क्षेत्र के विकास को लेकर कितनी संतुष्ट है? इन सवालों का जवाब ढूंढने स्वतंत्र छत्तीसगढ़ ( ताजा खबर,सही खबर ) का लोकप्रिय चुनावी टीम आज पहुंचा है छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले बालोद में। बालोद की जनता से आज हम रूबरू होंगे और जानेंगे चुनाव और नेताओ को लेकर उनकी क्या राय है। हम यह भी जानने की कोशिश करेंगे की मौजूद सरकार में उनके क्षेत्र ने विकास के किन आयामों को छुआ और क्या सरकार की नीति और योजनाएं आखिर कतार में खड़े लोगो तक पहुँच पाई। हम जानेंगे ये सब लेकिन उससे पहले बालोद जिले पर एक नजर।

बालोद जिला या कहे बालोद शहर तांदुला नदी के तट पर बसा है, जिसे आधिकारिक रूप से 1 जनवरी 2012 से जिला मुख्यालय का मिला। बालोद शहर धमतरी से 44 किमी तथा दुर्ग से दूरी 58 किमी है। बालोद जिले का जिला मुख्यालय बालोद है जो कि तांदुला (आदमाबाद) डैम के समीप है, जो सूखा एवं तांदुला नदी पर 1912 में विकसित किया गया था। बालोद वन, जल एवं खनिज संसाधन से सम्पन्न है। साथ ही अच्छा कृषि उत्पादन भी प्राप्त करता है। जिले के तान्दुला, खरखरा एवं गोंदली डैम सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं। जिले में 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच के अनेक मंदिर मिले हैं। तान्दुला जलाशय, चितवा डोंगरी गुफा, सीतादेवी मंदिर आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। मजदूर नेता शंकर गुहा नियोगी ने यहां के नगर दल्ली-राजहरा में 1977 में छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ का गठन किया और मजदूरों के हित में संघर्ष किया। 1946 में यहां के डौंडीलोहारा में ज़मीदार के अत्याचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। जिले में महापाषाण कालीन और लौहयुगीन साक्ष्य मिलते हैं।

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