1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी INDIA गठबंधन की रैली, SIR रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित तीन प्रमुख मांगें उठाएगी कांग्रेस |
रायपुर। मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली आयोजित कर रही है। पार्टी इसे कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ लोकतंत्र बचाने का देशव्यापी आंदोलन बता रही है। रैली में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शनिवार को दिल्ली रवाना हुए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत शुक्रवार को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के रविवार को दिल्ली पहुंचने की जानकारी दी गई है। इस आयोजन का उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना तथा केंद्र सरकार पर जवाबदेही के लिए दबाव बनाना है।
दिल्ली रवाना होने से पहले भूपेश बघेल ने कहा कि 1 नवंबर का प्रदर्शन ऐतिहासिक होगा और इसमें तीन प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR की प्रक्रिया रद्द करना और बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है। बघेल ने दावा किया कि SIR के जरिए देशभर में 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में भी पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए नामों का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। बघेल ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि प्रदेश में हटाए गए नामों में कितने लोग बांग्लादेशी नागरिक थे और कितने लोगों को देश से वापस भेजा गया। ये आंकड़े और आरोप कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं, जिन पर सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
रैली में छत्तीसगढ़ से 5 से 7 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस के अनुसार, शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 25 बसों में कार्यकर्ता दिल्ली रवाना हुए, जबकि कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता ट्रेन तथा विमान से भी पहुंच रहे हैं। पार्टी ने देशभर से करीब 10 लाख लोगों के रामलीला मैदान पहुंचने की संभावना जताई है। 1 नवंबर को होने वाली इस रैली में INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची, SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखेंगे। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बता रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक रणनीति करार देती रही है। ऐसे में रैली के दौरान विपक्षी दलों का शक्ति प्रदर्शन, उनके नेताओं के संबोधन और चुनाव सुधारों को लेकर उठाई जाने वाली मांगें राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।
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