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सीजीपीएससी घोटाले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को झटका, हाई कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका…

जांच एजेंसी के दस्तावेजों में प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आने का उल्लेख, स्वास्थ्य संबंधी दलीलों और सह-आरोपियों को मिली जमानत का तर्क भी नहीं आया काम

हेडलाइंस: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2020-2021 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व अध्यक्ष की मुश्किलें बरकरार, न्यायिक हिरासत से राहत नहीं।

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में आरोपी की प्रथम दृष्टया भूमिका सामने आने का उल्लेख किया। अदालत ने यह भी कहा कि गंभीर बीमारी या जेल में समुचित उपचार नहीं मिलने के संबंध में पर्याप्त प्रमाण के बिना धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत राहत देने का आधार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद सोनवानी को फिलहाल जमानत नहीं मिल सकी है।

स्वास्थ्य का हवाला देकर मांगी थी राहत

पूर्व अध्यक्ष की ओर से अदालत में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई थी। उनके पक्ष ने दलील दी कि हृदय संबंधी परेशानी के चलते 20 अगस्त 2026 को उन्हें अस्थायी पेसमेकर लगाया गया था और बाद में स्थायी पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई थी। उनकी उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को भी जमानत के पक्ष में आधार बनाया गया। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को बताया कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय या अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है। सह-आरोपियों को जमानत मिलने की दलील भी राहत दिलाने में सफल नहीं रही। इससे पहले रायपुर की विशेष अदालत ने 20 अगस्त 2026 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

चार्जशीट में करोड़ों रुपये के लेन-देन का उल्लेख

प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट के अनुसार, वर्ष 2020-2021 की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक कराने और पसंदीदा अभ्यर्थियों के चयन में मदद के बदले आर्थिक लेन-देन किए जाने के आरोप हैं। जांच एजेंसी ने मामले में लगभग 3.45 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित राशि का उल्लेख किया है। आरोपों के मुताबिक, 33 से अधिक अभ्यर्थियों से करीब तीन करोड़ रुपये जुटाने और रकम को अलग-अलग माध्यमों से विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने की बात भी जांच में सामने आई है। सोनवानी को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किए जाने के बाद से न्यायिक हिरासत में रखा गया है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा और आरोपी को दोषसिद्धि होने तक निर्दोष माने जाने के कानूनी सिद्धांत के अनुरूप ही देखा जाना चाहिए।

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