75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित पोत नौसेना में शामिल, निगरानी से लेकर ड्रोन संचालन और हथियारों के परीक्षण तक निभाएगा अहम भूमिका
हेडलाइंस
- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के करवार में आईएनएस समर्थक को नौसेना में शामिल किया।
- एलएंडटी के कट्टुपल्ली शिपयार्ड में निर्मित पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग।
- समुद्री निगरानी, गश्त, मानवरहित प्रणालियों के संचालन और आपदा राहत अभियानों में होगा इस्तेमाल।
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक को 16 अक्टूबर 2026 को नौसेना में शामिल किया गया। कर्नाटक के करवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पोत को नौसेना को समर्पित किया। इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन सहित वरिष्ठ नौसैनिक और रक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।
निजी भारतीय शिपयार्ड में हुआ निर्माण
आईएनएस समर्थक का निर्माण तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित एलएंडटी शिपयार्ड में किया गया है। यह भारतीय निजी शिपयार्ड द्वारा निर्मित नौसेना का पहला प्रमुख युद्धपोत बताया गया है। पोत में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक और विनिर्माण क्षमता के विकास को दर्शाता है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, समर्थक को बहुउद्देशीय परिचालन और तकनीकी परीक्षणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल एक प्रकार का सैन्य कार्य करना नहीं, बल्कि नौसेना की अलग-अलग जरूरतों के लिए एक सक्षम मंच उपलब्ध कराना है।
समुद्री निगरानी से लेकर ड्रोन संचालन तक
आईएनएस समर्थक समुद्री निगरानी, टोह लेने और तटीय क्षेत्रों में गश्त जैसे कार्यों में उपयोगी होगा। यह कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों में भी सहायता कर सकेगा। इसके अलावा, पोत पर मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों का संचालन किया जा सकता है। इससे नौसेना को समुद्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल और उनके प्रदर्शन का परीक्षण करने में मदद मिलेगी। पोत का एक प्रमुख कार्य हथियारों, रडार, सेंसर और अन्य रक्षा प्रणालियों के परीक्षण के लिए मंच उपलब्ध कराना है। स्वदेशी तकनीकों को वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में परखने से उनकी क्षमता और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सकेगा। इससे भविष्य में विकसित होने वाली नौसैनिक प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आपदा राहत और बचाव अभियानों में भी उपयोगी
समर्थक को मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में सहयोग के लिए भी तैयार किया गया है। समुद्री क्षेत्र में आपात स्थिति आने पर यह सहायता पहुंचाने और बचाव संबंधी गतिविधियों में भूमिका निभा सकता है। आवश्यकता के अनुसार इसे सीमित क्षमता वाले अस्पताल पोत में भी बदला जा सकता है। इसके अलावा, समुद्र में क्षतिग्रस्त जहाजों से जुड़े बचाव और पुनर्प्राप्ति कार्यों में भी इसकी उपयोगिता होगी। इस तरह का बहुउद्देशीय पोत नौसेना को अलग-अलग अभियानों के लिए एक ही मंच का इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। इससे परिचालन विकल्प बढ़ते हैं और नई प्रणालियों के परीक्षण के लिए अलग-अलग संसाधनों पर निर्भरता कम हो सकती है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती
आईएनएस समर्थक का नौसेना में शामिल होना स्वदेशी रक्षा निर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहाज निर्माण में घरेलू सामग्री, उपकरण और तकनीकी प्रणालियों का अधिक उपयोग देश के रक्षा औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में योगदान देता है। समर्थक का प्रतीक चिह्न लहरों से उभरते भारतीय हाथी को दर्शाता है, जो शक्ति, बुद्धिमत्ता और फुर्ती का प्रतीक है। इसका ध्येय वाक्य ‘विजयार्थम् एकनिष्ठता’ है, जिसका आशय है—विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है। भारतीय नौसेना में इस पोत के शामिल होने से समुद्री निगरानी, स्वदेशी हथियारों के परीक्षण और मानवरहित प्रणालियों के विकास के लिए नई क्षमताएं उपलब्ध होंगी। यह भारत की रक्षा जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा करने और समुद्री सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

