जापान के आइची-नागोया में भारतीय खिलाड़ियों ने जीते 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक; नई दिल्ली में शाम 4:30 बजे होगा सम्मान और संवाद का कार्यक्रम
हेडलाइंस
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 15 अक्टूबर को एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों से करेंगे मुलाकात।
- भारत ने 85 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
- पुरुष-महिला हॉकी और क्रिकेट टीमों के स्वर्ण पदक सहित कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने दर्ज की ऐतिहासिक उपलब्धियां।
नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में देश का गौरव बढ़ाने वाले भारतीय खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, 15 अक्टूबर को मुलाकात करेंगे। नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में शाम लगभग 4:30 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री खिलाड़ियों से संवाद करेंगे और उन्हें संबोधित भी करेंगे। कार्यक्रम में भारतीय दल के खिलाड़ी, प्रशिक्षक, सहयोगी स्टाफ, भारतीय ओलंपिक संघ के अधिकारी, राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि तथा युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे।
जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक आयोजित एशियाई खेलों में भारत ने कुल 85 पदक अपने नाम किए। इनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारतीय दल ने लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में शीर्ष पांच देशों में जगह बनाई।
भारतीय ओलंपिक संघ के अनुसार, यह एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पदक प्रदर्शन है। वर्ष 2023 में हांगझोऊ में आयोजित पिछले एशियाई खेलों में भारत ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे। इस बार कुल पदकों की संख्या कम रही, लेकिन कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं।
हॉकी और क्रिकेट में स्वर्णिम प्रदर्शन
एशियाई खेलों में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर विशेष उपलब्धि हासिल की। यह पहली बार था जब भारत की दोनों हॉकी टीमों ने एक ही एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते। पुरुष टीम ने मलेशिया को हराकर खिताब बरकरार रखा, जबकि महिला टीम ने चीन को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
क्रिकेट में भी भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। कबड्डी में भी पुरुष और महिला टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तीरंदाजी, कुश्ती और निशानेबाजी में भी चमके खिलाड़ी
तीरंदाजी भारत के सफल खेलों में शामिल रही। भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य सहित कुल नौ पदक जीते। रिकर्व तीरंदाजी में भी भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ एशियाई खेल प्रदर्शन दर्ज किया।
कुश्ती में भारतीय पहलवानों ने छह पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल रहे। मुक्केबाजी में भारत को तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदक मिले। निशानेबाजी में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 15 पदक हासिल किए, जिनमें तीन स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य शामिल हैं।
एथलेटिक्स भारतीय दल के लिए सबसे अधिक पदक लाने वाला खेल रहा। इस स्पर्धा में भारत ने कुल 24 पदक जीते। हालांकि, स्वर्ण पदकों की संख्या सीमित रही, फिर भी विभिन्न दौड़ और मैदानी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने निरंतर प्रदर्शन किया।
कई खेलों में पहली बार और लंबे अंतराल के बाद उपलब्धियां
इस एशियाई खेल में भारत ने कुछ ऐसी उपलब्धियां भी हासिल कीं, जिन्होंने खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। महिला ट्रैप निशानेबाजी में भारत ने पहली बार स्वर्ण पदक जीता। सॉफ्ट टेनिस और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पहली बार पदक हासिल किए।
भारोत्तोलन में मीराबाई चानू ने रजत पदक जीतकर एशियाई खेलों में इस खेल में भारत का 28 साल का पदक इंतजार समाप्त किया। ग्रीको-रोमन कुश्ती में भी भारत ने 64 साल बाद फाइनल में जगह बनाते हुए रजत पदक हासिल किया। महिला गोल्फ में प्रणवी उर्स ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर नई उपलब्धि दर्ज की।
प्रधानमंत्री के साथ संवाद में खिलाड़ियों के अनुभवों पर रहेगी नजर
प्रधानमंत्री के साथ होने वाली मुलाकात भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सम्मान देने और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके अनुभवों को सुनने का अवसर होगी। इसमें खिलाड़ियों की तैयारियों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत के लिए अब अगली चुनौती इन उपलब्धियों को निरंतरता में बदलने की है। खेल सुविधाओं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रतिभा की शुरुआती पहचान, पोषण और चोटों से बचाव की बेहतर व्यवस्था के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन को और मजबूत किया जा सकता है। एशियन गेम्स में मिली सफलताएं आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, विशेषकर ओलंपिक की तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करती हैं।

