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महिला सुरक्षा और बच्चों के पोषण पर केंद्र का फोकस, विभागीय शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे प्रधानमंत्री मोदी…

नई दिल्ली में 8 और 9 अक्टूबर को दो दिवसीय सम्मेलन, आंगनवाड़ी व्यवस्था, प्रारंभिक शिक्षा, बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण पर बनेगी कार्ययोजना
हेडलाइंस

नई दिल्ली। महिला एवं बाल विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने के उद्देश्य से 8 और 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 अक्टूबर को शाम लगभग 4:30 बजे सुषमा स्वराज भवन में सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लेंगे और उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में सभी राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास क्षेत्र के अधिकारियों की भागीदारी निर्धारित है।

आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर जोर

सम्मेलन के प्रमुख विषयों में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना शामिल है। बेहतर पोषण और बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के लिए इन केंद्रों की सेवाओं, व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली को मजबूत करने पर विचार-विमर्श होगा। इसका उद्देश्य बच्चों के शुरुआती विकास के लिए बेहतर आधार तैयार करना और योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना है।

बाल संरक्षण और महिला सुरक्षा की समीक्षा

शिखर सम्मेलन में कमजोर और जरूरतमंद बच्चों के लिए संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संस्थागत और विधायी प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल, मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों के समाधान को महत्वपूर्ण माना गया है।

महिला सशक्तिकरण योजनाओं के परिणामों पर मंथन

सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना है। केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों तक सेवाओं की पहुंच और बेहतर परिणाम हासिल करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। साथ ही विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही अच्छी कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर भी मिलेगा।

सहकारी संघवाद के जरिए बेहतर सेवा वितरण का लक्ष्य

यह विभागीय शिखर सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित सम्मेलनों की श्रृंखला का दूसरा आयोजन है। इस मॉडल के तहत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सामूहिक सहमति बनाने, प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान खोजने और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया जाता है। महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में बेहतर शासन और प्रभावी सेवा वितरण के लिए इस समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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