वित्त वर्ष 2025-26 में 8.17 मिलियन टीईयू कंटेनर कार्गो का संचालन, आयात-निर्यात को आसान बनाने पर जोर
हेडलाइंस
- जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8.17 मिलियन टीईयू कंटेनर कार्गो संभाला।
- प्रमुख बंदरगाहों के कुल कंटेनर यातायात में जेएनपीए की हिस्सेदारी 53.93 प्रतिशत रही।
- इसी अवधि में बंदरगाह ने 102.01 मिलियन टन कुल कार्गो का संचालन किया।
- प्रत्यक्ष बंदरगाह डिलीवरी और प्रत्यक्ष बंदरगाह प्रवेश जैसी सुविधाओं से व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर।
- रेल और सड़क कनेक्टिविटी से छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के उद्योगों को समुद्री मार्ग का लाभ।
- 277 हेक्टेयर में विकसित विशेष आर्थिक क्षेत्र से विनिर्माण और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी।
- हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर।
मुंबई। भारत के बढ़ते समुद्री व्यापार में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में जेएनपीए ने 8.17 मिलियन टीईयू कंटेनर कार्गो का संचालन किया, जो देश के प्रमुख बंदरगाहों द्वारा संभाले गए कुल कंटेनर यातायात का 53.93 प्रतिशत रहा। इसी अवधि में बंदरगाह ने कुल 102.01 मिलियन टन कार्गो संभाला। छत्तीसगढ़ के पत्रकारों के महाराष्ट्र दौरे के दौरान जेएनपीए की महाप्रबंधक मनीषा जाधव ने बंदरगाह की कार्यप्रणाली, व्यापार सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।
आयात-निर्यात की प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर
जेएनपीए का संचालन 26 मई 1989 को शुरू हुआ था। पिछले 37 वर्षों में बंदरगाह की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया गया है। वर्तमान में यहां पांच कंटेनर टर्मिनल के साथ तरल और सामान्य माल के लिए भी अलग सुविधाएं उपलब्ध हैं। बंदरगाह की मौजूदा कंटेनर क्षमता करीब 10.4 मिलियन टीईयू प्रतिवर्ष बताई गई है।
आयातकों के लिए प्रत्यक्ष बंदरगाह डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। निर्धारित सीमा शुल्क प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र कंटेनरों को सीधे बंदरगाह से कारखाने या निर्धारित स्थान तक ले जाया जा सकता है। इसी तरह निर्यातकों के लिए प्रत्यक्ष बंदरगाह प्रवेश की व्यवस्था है, जिसके तहत तैयार निर्यात कंटेनरों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीधे बंदरगाह तक पहुंचाया जा सकता है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य अतिरिक्त माल ढुलाई और अनावश्यक हैंडलिंग को कम करना है।
छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के उद्योगों को लाभ
जेएनपीए रेल और सड़क नेटवर्क से देश के आंतरिक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसका लाभ महाराष्ट्र के अलावा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और अन्य राज्यों के उद्योगों को भी मिल सकता है। छत्तीसगढ़ के इस्पात, खनिज, कृषि आधारित, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग क्षेत्र के उत्पादों को रेल या सड़क के जरिए जेएनपीए तक पहुंचाकर समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकता है।
इसी तरह आयातित मशीनरी और औद्योगिक कच्चे माल को बंदरगाह से देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में अंतर्देशीय कंटेनर डिपो से संबंधित रेल परिवहन के जरिए करीब 1.15 मिलियन टीईयू कंटेनर कार्गो के संचालन की जानकारी दी गई है।
परिचालन दक्षता और हरित तकनीक पर फोकस
जेएनपीए के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम 1.71 दिन रहा। अगस्त 2026 के आधिकारिक विवरण के अनुसार, विश्व बैंक और एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स 2025 में जेएनपीए को 22वां स्थान मिला है। कम समय में जहाजों की आवाजाही पूरी होने से माल परिवहन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
बंदरगाह ने 277 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष आर्थिक क्षेत्र भी विकसित किया है। इसका उद्देश्य विनिर्माण और निर्यात आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना है। वहीं करीब 45 हेक्टेयर में विकसित केंद्रीकृत पार्किंग प्लाजा में लगभग 3,000 ट्रकों को खड़ा करने की क्षमता बताई गई है। ट्रक चालकों के लिए ठहरने, शौचालय और स्नानघर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
पर्यावरण संरक्षण के तहत बंदरगाह परिसर में इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। कंटेनर परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने के साथ जहाजों को बंदरगाह पर खड़े रहने के दौरान बिजली उपलब्ध कराने के लिए शोर पावर व्यवस्था विकसित करने की योजना भी बताई गई है। गेट स्वचालन, कंटेनर ट्रैकिंग और डिजिटल प्रणालियों के जरिए परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
वाढवण बंदरगाह से भविष्य में बढ़ेगी क्षमता
महाराष्ट्र में विकसित किया जा रहा वाढवण बंदरगाह भविष्य में समुद्री कार्गो क्षमता बढ़ाने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। जेएनपीए के अधिकारियों के अनुसार, यह बंदरगाह जेएनपीए से करीब 150 किलोमीटर दूर है और इसकी प्रस्तावित क्षमता जेएनपीए की वर्तमान क्षमता से लगभग ढाई गुना होगी। इससे भविष्य में बढ़ते समुद्री व्यापार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है। जेएनपीए की मौजूदा योजनाओं में कार्गो संचालन, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल तकनीक, प्रत्यक्ष डिलीवरी और हरित उपायों को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बेहतर समुद्री संपर्क से छत्तीसगढ़ समेत मध्य भारत के उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सुविधा मिल सकती है और आयातित औद्योगिक सामग्री को भी अपेक्षाकृत सुगम तरीके से देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया जा सकता है।

