वर्षों पुराने जल बंटवारे के विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश तेज, दोनों राज्यों के बीच सहमति का रास्ता तलाशेगी उच्चस्तरीय बैठक
हेडलाइंस
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में बैठक
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी होंगे शामिल
- महानदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन पर होगी चर्चा
- केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के अधिकारी भी प्रक्रिया में शामिल
- 2018 से महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है मामला
रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में आज एक अहम बैठक होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में होने वाली बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी शामिल होंगे। बैठक में दोनों राज्यों के बीच महानदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
सितंबर में दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच हो चुकी है बातचीत
यह बैठक 20 सितंबर को भुवनेश्वर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद हो रही है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने उस दौरान महानदी समेत दोनों राज्यों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की थी। मुलाकात के बाद साय ने महानदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के बीच किसी बड़ी समस्या से इनकार करते हुए विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद जताई थी।
इससे पहले 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। केंद्र सरकार ने बातचीत, तकनीकी सहयोग और आपसी सहमति के माध्यम से विवाद का समाधान तलाशने पर जोर दिया था। केंद्रीय जल आयोग भी दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर चर्चा में शामिल है।
2016 से जारी है विवाद, 2018 में बना था न्यायाधिकरण
महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद 2016 से प्रमुख रूप से सामने आया। ओडिशा ने छत्तीसगढ़ में ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराज और जल परियोजनाओं को लेकर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इससे नीचे की ओर पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके बाद केंद्र सरकार ने मार्च 2018 में अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया। मामला अभी न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित है।
विवाद के समाधान के लिए अब न्यायाधिकरण की कार्यवाही के समानांतर आपसी बातचीत और तकनीकी स्तर पर सहमति बनाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। केंद्रीय जल आयोग ने दोनों राज्यों के बीच हुई पिछली बैठकों से संबंधित विवरण न्यायाधिकरण के समक्ष रखा है, जिसे रिकॉर्ड पर लिया गया है। तकनीकी समितियां जल उपलब्धता, जल उपयोग, ऊपरी क्षेत्र की परियोजनाओं और दोनों राज्यों के हितों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर रही हैं।
आज की बैठक पर टिकी नजरें
आज होने वाली उच्चस्तरीय बैठक से यह स्पष्ट होगा कि दोनों राज्य महानदी जल के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर किसी साझा समाधान के कितने करीब पहुंचते हैं। हालांकि, बैठक को अंतिम समझौते के रूप में नहीं देखा जा सकता। किसी भी स्थायी समाधान के लिए संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होगा। फिलहाल दोनों राज्यों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और आपसी सहमति का रास्ता तलाशने पर जोर है।
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