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भाटापारा में जिंदा व्यक्ति के नाम जारी हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र! दस्तावेज में दर्ज है 1970 की मौत की तारीख…

धुर्राबांधा पंचायत में सामने आया चौंकाने वाला मामला, शिकायतकर्ता ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर जांच और कार्रवाई की मांग की
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भाटापारा। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के भाटापारा क्षेत्र के ग्राम धुर्राबांधा से सरकारी दस्तावेजों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति के नाम मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है। सामने आए दस्तावेज के अनुसार प्रमाण पत्र में संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की तारीख 15 फरवरी 1970 दर्ज है, जबकि प्रमाण पत्र 7 अप्रैल 2026 को जारी किया गया बताया गया है। मामले को लेकर ग्राम निवासी राजेश अग्रवाल ने भाटापारा एसडीएम कार्यालय में लिखित शिकायत देकर जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

1970 में मृत्यु, 2026 में जारी हुआ प्रमाण पत्र

शिकायतकर्ता के अनुसार जिस व्यक्ति के नाम मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया है, वह वर्तमान में जीवित है। ऐसे में उसके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद दस्तावेज तैयार करने और सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेज में मृत्यु की तारीख 15 फरवरी 1970 दर्ज है, जबकि प्रमाण पत्र 7 अप्रैल 2026 को जारी किया गया। यानी करीब 56 वर्ष पुरानी मृत्यु तारीख के आधार पर वर्तमान समय में प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है।

पंचायत सचिव की भूमिका की जांच की मांग

शिकायत में ग्राम पंचायत सचिव सहित मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से यह पता लगाने का आग्रह किया है कि प्रमाण पत्र जारी करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान, मृत्यु संबंधी जानकारी और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया गया। साथ ही यह भी जांच करने की मांग की गई है कि दस्तावेज में वर्ष 1970 की मृत्यु तारीख दर्ज होने का आधार क्या था।

एसडीएम कार्यालय में शिकायत, जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

मामले को लेकर भाटापारा एसडीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई है। फिलहाल सामने आए आरोपों की आधिकारिक जांच और प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन होना बाकी है। इसलिए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की वास्तविक प्रक्रिया और इसमें किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही अथवा अन्य कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

यदि जांच में दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल यह मामला पंचायत स्तर पर महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी करने से पहले किए जाने वाले सत्यापन और रिकॉर्ड व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।

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