स्वतंत्र छत्तीसगढ़
श्रमिक संगठनों की मांगों पर विचार के लिए मंत्रिस्तरीय उपसमिति गठित, महा रैली से पहले सरकार देगी विस्तृत जवाब
हेडलाइंस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ बीएमएस प्रतिनिधिमंडल की अहम बैठक | 24 प्रमुख श्रमिक मांगों पर हुई चर्चा | न्यूनतम वेतन, महंगाई भत्ता, पेंशन और नियमितीकरण जैसे मुद्दे शामिल | बिजली, नगरीय निकाय, आंगनबाड़ी, परिवहन और औद्योगिक श्रमिकों से जुड़े विषय उठे | 1 अक्टूबर की महा रैली से पहले सरकार के जवाब का इंतजार|
रायपुर। भारतीय मजदूर संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित महा रैली, धरना एवं प्रदर्शन से पहले श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ महत्वपूर्ण बैठक की गई। बीएमएस प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में श्रमिकों की 24 प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखीं। इनमें मानदेय वृद्धि, न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण, पुरानी पेंशन, महंगाई भत्ता, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं।
बीएमएस की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और मध्याह्न भोजन रसोइयों के मानदेय में वृद्धि की मांग रखी गई। वहीं ठेका एवं संविदा कर्मचारियों के लिए निगम गठित कर सीधे भुगतान की व्यवस्था तथा 30 हजार रुपये न्यूनतम मासिक वेतन निर्धारित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। निर्माणी मजदूरों के श्रम कार्ड के लिए ट्रेड यूनियनों को मान्यता देने का विषय भी सरकार के सामने रखा गया।
वेतन, पेंशन और कर्मचारियों के नियमितीकरण के मुद्दे
बैठक में बिजली कंपनियों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने तथा संविदा श्रमिकों के नियमितीकरण की मांग की गई। कर्मचारियों के लिए चतुर्थ समयमान वेतनमान लागू करने, 1 जनवरी 2026 से लंबित महंगाई भत्ते और एरियर्स का भुगतान करने तथा नगरीय निकाय कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 2 तारीख तक वेतन देने की मांग भी रखी गई।
बीएमएस ने नगरीय निकाय कर्मचारियों को नए सेटअप के अनुसार पदोन्नति का लाभ देने और सातवें वेतनमान के एरियर्स के भुगतान की मंजूरी देने की मांग की। इसके अलावा छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य कंप्यूटर ऑपरेटरों को 12 माह का वेतन एवं नियमितीकरण का लाभ तथा धान मंडी कर्मचारियों को पद के अनुरूप वेतनमान, महंगाई भत्ता और अन्य सुविधाएं देने का मुद्दा भी चर्चा में रहा।
भिलाई इस्पात संयंत्र और कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों की मांगें भी शामिल
श्रमिक संगठन ने भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के वर्ष 2017 से लंबित वेतनमान को लागू करने की मांग रखी। संयंत्र के ठेका मजदूरों को खनिज विभाग के ठेका श्रमिकों के समान मजदूरी देने तथा कोल इंडिया में जेबीसीसीआई-12 का गठन कर 12वां वेतन समझौता लागू करने का विषय भी बैठक में उठाया गया।
इसके साथ ही निजी परिवहन कर्मचारियों के लिए कल्याण बोर्ड गठित करने, ऑटो, टैक्सी और ई-रिक्शा के लिए स्थायी पार्किंग की व्यवस्था करने तथा अवैध बाइक सेवाओं पर रोक लगाने की मांग की गई। श्रमिकों के लिए 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग भी बीएमएस की प्रमुख मांगों में शामिल रही।
ईएसआईसी, पीएफ, बोनस और औद्योगिक सुरक्षा पर भी जोर
बीएमएस ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम की वेतन सीमा 21 हजार से बढ़ाकर 42 हजार रुपये करने की मांग रखी। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए 7,500 रुपये न्यूनतम पेंशन, महंगाई भत्ता और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने तथा भविष्य निधि के अनिवार्य वेतन निर्धारण की सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया।
बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा 7 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये करने और औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर औद्योगिक सुरक्षा समितियां गठित करने की मांग भी की गई। बीएमएस ने इन समितियों में श्रमिक प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही है।
मांगों पर मंत्रिस्तरीय उपसमिति करेगी आगे विचार
बीएमएस के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखी गई मांगों और श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर आगे विस्तृत विचार-विमर्श और समाधान की दिशा में कार्रवाई के लिए मंत्रिस्तरीय उपसमिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि 1 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित बीएमएस की महा रैली एवं धरना-प्रदर्शन से पहले संगठन द्वारा उठाई गई मांगों पर सरकार की ओर से विस्तृत जवाब दिया जाएगा। अब श्रमिक संगठनों की नजर सरकार के प्रस्तावित जवाब और मंत्रिस्तरीय उपसमिति की आगे की कार्रवाई पर रहेगी।
बैठक में श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और वित्त मंत्री ओपी चौधरी मौजूद रहे। बीएमएस की ओर से क्षेत्र संगठन मंत्री सीवी राजेश, अखिल भारतीय मंत्री राधेश्याम जायसवाल, प्रदेश अध्यक्ष शोभा सिंह देव, अखिल भारतीय सह-उद्योग प्रभारी दिनेश कुमार पांडे और प्रदेश महामंत्री शंखध्वनि बनाफर सहित विभिन्न महासंघों के महामंत्री एवं पदाधिकारी शामिल हुए। संगठन के अनुसार कुल 16 प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ चर्चा में हिस्सा लिया।
बीएमएस छत्तीसगढ़ प्रदेश ने कहा है कि संगठन श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और हितों से जुड़े विषयों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से आगे भी उठाता रहेगा। अब 1 अक्टूबर की प्रस्तावित महा रैली से पहले सरकार का विस्तृत जवाब इस पूरे घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।

