रायपुर-बलौदाबाजार-सारंगढ़ फोरलेन को लेकर कांग्रेस का दावा, कहा—लंबे समय से जमीन पर अपेक्षित प्रगति नहीं
हेडलाइंस
एनएच-130बी को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर निशाना साधा | रायपुर से सारंगढ़ तक करीब 186.8 किलोमीटर मार्ग के उन्नयन की योजना | चार लेन सड़क के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की प्रक्रिया जारी | केंद्र के आधिकारिक दस्तावेजों में निविदा प्रक्रिया और कई संशोधन दर्ज
रायपुर। रायपुर से बलौदाबाजार होते हुए सारंगढ़ तक प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग-130बी के उन्नयन को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि महत्वपूर्ण सड़क परियोजना लंबे समय से कागजों और सरकारी दावों तक सीमित है तथा निर्माण की अपेक्षित जमीनी प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। कांग्रेस के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने सरकार पर परियोजना का श्रेय लेने की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-130बी पर रायपुर से सारंगढ़ तक करीब 186.8 किलोमीटर हिस्से को दो लेन से चार लेन सड़क में बदलने तथा पक्के किनारे विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के स्तर पर चल रही है। आधिकारिक ई-निविदा दस्तावेज में इस काम को रायपुर के किलोमीटर शून्य से सारंगढ़ के किलोमीटर 186.800 तक प्रस्तावित किया गया है।
इस परियोजना की प्रक्रिया में वर्ष 2026 के दौरान कई बार निविदा की तारीखों में संशोधन किया गया। सरकारी निविदा रिकॉर्ड के अनुसार मूल रूप से जून 2026 में जारी प्रक्रिया में जुलाई और सितंबर में कई संशोधन दर्ज हुए। आधिकारिक निविदा स्थिति में अब इस निविदा को रद्द किए जाने का उल्लेख भी है। ऐसे में परियोजना की आगे की प्रक्रिया और नई निविदा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने एनएच-130बी के विभिन्न हिस्सों से संबंधित भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए मार्च 2026 में सक्षम अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की थी। इसमें बलौदाबाजार-भाटापारा और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि परियोजना के लिए भूमि संबंधी प्रशासनिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि सड़क परियोजना के पूरा होने से रायपुर, बलौदाबाजार और सारंगढ़ क्षेत्र के बीच आवागमन बेहतर होगा तथा व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। वहीं उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से पता चलता है कि परियोजना से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, निविदा और भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाएं अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। परियोजना में देरी के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है, यह संबंधित विभागों के आधिकारिक स्पष्टीकरण और आगे की निविदा प्रक्रिया से अधिक स्पष्ट होगा।

