चार्जशीट में ग्रामीण विकास समिति के जरिए राशि पहुंचाने का आरोप, जांच एजेंसी ने परीक्षा में कथित लाभ पहुंचाने से जोड़ा
हेडलाइंस
रायपुर में विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम अदालत में ईडी ने दाखिल की अभियोजन शिकायत | 99 पन्नों की शिकायत के साथ करीब 3700 पन्नों के दस्तावेज | 45 लाख रुपये की राशि दो किस्तों में मिलने का दावा | जांच में परीक्षा चयन और कथित धन लेन-देन के बीच संबंधों की पड़ताल
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। एजेंसी की ओर से दाखिल शिकायत करीब 99 पन्नों की है, जबकि इसके साथ लगभग 3700 पन्नों के दस्तावेज लगाए गए हैं। ईडी ने मामले में अपराध से अर्जित राशि करीब 3.28 करोड़ रुपये होने का दावा किया है।
ईडी के आरोप के अनुसार, ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से 45 लाख रुपये की राशि पहुंचाई गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम एक निजी इस्पात कंपनी से कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत समिति को मिली और इसे कथित तौर पर परीक्षा में एक व्यवसायी के बेटे और बहू को लाभ पहुंचाने से जोड़ा गया है। उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार यह राशि 20 लाख और 25 लाख रुपये की दो किस्तों में समिति तक पहुंची थी।
चार्जशीट में समिति के संचालन और राशि के उपयोग को लेकर भी जांच का उल्लेख है। ईडी का दावा है कि टामन सिंह सोनवानी समिति से जुड़े थे और राशि की जानकारी तथा उसके इस्तेमाल से उनका संबंध था। जांच एजेंसी ने सीएसआर के रूप में दिखाई गई इस राशि को कथित अपराध से अर्जित धन की जांच का हिस्सा बनाया है। हालांकि, इन सभी आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मामले में सीजीपीएससी की वर्ष 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों, प्रश्नपत्र की उपलब्धता और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर की भी जांच की जा रही है। ईडी के अनुसार, अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से कथित रूप से रकम जुटाने तथा परीक्षा में लाभ पहुंचाने से संबंधित अलग-अलग वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। एजेंसी ने सात आरोपितों के खिलाफ अभियोजन शिकायत में उनकी कथित अलग-अलग भूमिकाओं का भी उल्लेख किया है।
ईडी की कार्रवाई के बाद अब मामले की अगली प्रक्रिया विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम अदालत में होगी। आरोपपत्र में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी का पक्ष हैं और आरोपितों की दोषसिद्धि अभी न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर है। ऐसे में मामले में सामने आने वाले दस्तावेज, गवाहों के बयान और न्यायालय की कार्यवाही आगे की स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होगी।

