स्वतंत्र छत्तीसगढ़
गणेश चतुर्थी 2026: आज 14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत हो रही है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक का देवता माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु घर, दुकान, कार्यालय और प्रतिष्ठानों में गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से सुख-समृद्धि और शुभता की कामना की जाती है।
इस बार गणपति स्थापना के लिए दिनभर में 5 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। घर में पूजा के लिए छोटी मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है। वहीं कार्यालय, दुकान या कारखाने जैसे व्यावसायिक स्थानों पर श्रद्धालु अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार गणपति की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी पर कैसी प्रतिमा स्थापित करें?
घर के लिए सामान्यतः मिट्टी से बनी छोटी गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है। प्रतिमा ऐसी हो जिसे पूजा के बाद आसानी से विसर्जित किया जा सके। गणपति की सूंड किस दिशा में हो, इसे लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं, इसलिए परिवार की परंपरा के अनुसार प्रतिमा का चयन किया जा सकता है।
घर में गणपति स्थापना के लिए पूजा स्थान को पहले अच्छी तरह साफ करें। लकड़ी की चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा के सामने दीपक, कलश और पूजा की अन्य सामग्री रखें।
गणपति स्थापना के लिए 5 शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा और स्थापना के लिए शुभ समय का विशेष महत्व माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार अंतिम समय अवश्य जांच लें।
रायपुर और छत्तीसगढ़ में स्थापना करने वाले श्रद्धालु स्थानीय पंचांग में दिए गए गणेश स्थापना मुहूर्त को प्राथमिकता दें। विशेष रूप से मध्याह्न काल में गणपति पूजा को महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणेश स्थापना के लिए पूजा सामग्री
गणपति स्थापना से पहले पूजा की सामग्री तैयार कर लें। इसके लिए सामान्य रूप से ये चीजें रखी जा सकती हैं:
- गणेशजी की मिट्टी की प्रतिमा
- चौकी और स्वच्छ लाल या पीला कपड़ा
- कलश और जल
- रोली और कुमकुम
- अक्षत यानी साबुत चावल
- दूर्वा घास
- लाल या अन्य ताजे फूल
- माला
- दीपक और घी/तेल
- धूप और अगरबत्ती
- पंचामृत
- फल और नैवेद्य
- मोदक या लड्डू
- नारियल
- सुपारी
- पान
- दक्षिणा
- कपूर
पूजा की सामग्री में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और स्वच्छता है। उपलब्ध सामग्री के अनुसार सरल तरीके से भी गणपति पूजा की जा सकती है।
गणपति स्थापना की आसान पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा के सामने कलश रखें और उसमें जल भरकर आम के पत्ते तथा नारियल रख सकते हैं।
इसके बाद स्वयं भी स्वच्छ होकर पूजा के लिए बैठें और भगवान गणेश का ध्यान करें। सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। फिर गणेशजी को जल से स्नान कराने की परंपरा हो तो स्नान कराएं। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर पुनः स्वच्छ जल अर्पित करें।
गणेशजी को वस्त्र या मौली अर्पित करें। इसके बाद रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वा विशेष रूप से प्रिय मानी जाती है। इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
गणेशजी को ये मंत्र बोलकर करें पूजा
पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश के सरल मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः।
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करते हुए गणेशजी को पुष्प और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद गणेशजी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।
पूजा के अंत में भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। परिवार के सभी सदस्य आरती में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।
गणेशजी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
गणेश पूजा में दूर्वा का विशेष स्थान माना जाता है। धार्मिक कथाओं में दूर्वा को भगवान गणेश से जोड़कर देखा गया है। पूजा के दौरान श्रद्धालु दूर्वा की छोटी-छोटी जुड़ियां बनाकर गणेशजी को अर्पित करते हैं।
इसी तरह लाल फूल, सिंदूर और मोदक भी गणेश पूजा में विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। हालांकि पूजा की विधि और सामग्री परिवार, क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
घर में बैठे गणेश या खड़े गणपति?
गणेश प्रतिमा को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक और पारिवारिक परंपराएं हैं। सामान्यतः घर की पूजा के लिए बैठे हुए गणेशजी की प्रतिमा को शुभ मानने की परंपरा प्रचलित है। वहीं दुकान, कार्यालय या कारखाने जैसे कार्यस्थल पर खड़े गणपति की प्रतिमा स्थापित करने की मान्यता कई स्थानों पर देखने को मिलती है।
हालांकि इसे अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाना चाहिए। प्रतिमा का चयन करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना उचित है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से बचने का विधान बताया गया है। इसके पीछे भगवान गणेश से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। मान्यता है कि गणेशजी ने चंद्रमा को उसके अहंकार के कारण श्राप दिया था।
इसी कारण गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा कई क्षेत्रों में आज भी निभाई जाती है। यदि अनजाने में चंद्रमा दिखाई दे जाए तो धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेशजी की पूजा और संबंधित मंत्रों का जाप करने की परंपरा है।
स्थापना के बाद रोज कैसे करें गणेश पूजा?
गणपति स्थापना के बाद गणेशोत्सव के दिनों में सुबह और शाम पूजा की जा सकती है। सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। गणेशजी को दूर्वा, फूल और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद गणेश मंत्र का जाप करें और आरती करें।
भोग में मोदक, लड्डू, फल या घर में उपलब्ध सात्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। शाम की पूजा में परिवार के सभी सदस्य शामिल होकर आरती कर सकते हैं।
गणेश विसर्जन कब होगा?
गणेशोत्सव का मुख्य विसर्जन अनंत चतुर्दशी, 25 सितंबर को किया जाएगा। हालांकि कई परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या अन्य निर्धारित अवधि के बाद भी गणपति विसर्जन करते हैं।
विसर्जन के समय भगवान गणेश की विधिवत पूजा और आरती करने के बाद श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का उपयोग करना बेहतर है।
गणपति बप्पा मोरया!
गणेश चतुर्थी केवल उत्सव का अवसर ही नहीं बल्कि परिवार के साथ पूजा, भक्ति और सकारात्मक संकल्प लेने का पर्व भी है। गणपति स्थापना के दौरान स्वच्छता, शांतिपूर्ण वातावरण और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा के समय और विधि में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।

