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बिजली बिल देर से जमा करने पर अब नहीं लगेगा पूरे महीने का सरचार्ज, 65 लाख उपभोक्ताओं को राहत…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़

मुख्य बातें
देर से बिल जमा करने पर अब प्रतिदिन के हिसाब से लगेगा विलंब शुल्क
4000 रुपये के बिल पर एक दिन की देरी में सिर्फ 1.60 रुपये शुल्क
एक महीने की देरी पर 48 रुपये विलंब शुल्क लगेगा
स्मार्ट मीटर से हर आधे घंटे में सर्वर पर पहुंचेगा बिजली खपत का डेटा
एडवांस भुगतान पर छूट 1.25 प्रतिशत से घटकर 0.75 प्रतिशत हुई

रायपुर। छत्तीसगढ़ के करीब 65 लाख बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। बिजली बिल निर्धारित समय के बाद जमा करने पर अब पूरे महीने का विलंब शुल्क नहीं देना होगा। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ता जितने दिन बिल जमा करने में देरी करेगा, उतने ही दिनों के आधार पर विलंब शुल्क लगाया जाएगा। इससे खासकर उन उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जिनका भुगतान एक-दो दिन की देरी से होता था।

नई व्यवस्था के अनुसार अब 0.04 प्रतिशत प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क लगेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता का बिजली बिल 4000 रुपये है और वह एक दिन देरी से भुगतान करता है, तो उसे 1.60 रुपये विलंब शुल्क देना होगा। वहीं यदि भुगतान में एक महीने की देरी होती है तो विलंब शुल्क 48 रुपये होगा। इससे पहले एक-दो दिन की देरी होने पर भी पूरे महीने का 1.5 प्रतिशत विलंब शुल्क वसूला जाता था।

बिजली व्यवस्था में स्मार्ट मीटर को लेकर भी बदलाव किया गया है। स्मार्ट मीटर में अब मैन्युअल रीडिंग की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। मीटर से बिजली खपत का डेटा हर आधे घंटे में सीधे सर्वर पर भेजा जाएगा और इसी आधार पर बिल तैयार होगा। इससे मीटर रीडिंग की प्रक्रिया अधिक स्वचालित होगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होने की उम्मीद है।

हालांकि, एडवांस में बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली छूट में कमी की गई है। पहले निर्धारित समय से पहले एडवांस भुगतान करने पर 1.25 प्रतिशत की छूट मिलती थी, जिसे अब घटाकर 0.75 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी समय से पहले बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में कम आर्थिक लाभ मिलेगा।

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा उन उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है, जिनसे कभी-कभी बिल भुगतान में मामूली देरी हो जाती है। अब एक-दो दिन की देरी के लिए पूरे महीने का विलंब शुल्क नहीं देना होगा। वहीं स्मार्ट मीटर से बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और बिजली खपत के आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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