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रायपुर एयरपोर्ट के निजीकरण की तैयारी तेज, 50 साल के PPP मॉडल में औरंगाबाद के साथ होगा संचालन…

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प्रमुख बिंदु:

रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट को PPP मॉडल पर देने की तैयारी
देश के 11 एयरपोर्ट को 50 साल की कंसेशन अवधि पर निजी कंपनियों को सौंपने का प्रस्ताव
रायपुर और औरंगाबाद एयरपोर्ट को एक ही समूह में शामिल किया गया
11 एयरपोर्ट के विकास और संचालन में करीब 8,622 करोड़ रुपए निवेश का अनुमान
निजी कंपनी को शुरुआती एक साल तक संयुक्त प्रबंधन करना होगा
कम से कम तीन साल तक AAI के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखने का प्रस्ताव

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के संचालन और विकास में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने देश के 11 प्रमुख एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल के तहत निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार इन एयरपोर्ट को 50 साल की कंसेशन अवधि के लिए निजी ऑपरेटरों को दिया जा सकता है। इस योजना में रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट को महाराष्ट्र के औरंगाबाद एयरपोर्ट के साथ एक ही समूह में शामिल किया गया है।

केंद्र सरकार की इस प्रस्तावित योजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति यानी पीपीपीएसी से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। योजना के तहत 11 एयरपोर्ट को पांच अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह में एक बड़े एयरपोर्ट के साथ छोटे या मध्यम श्रेणी के एयरपोर्ट को शामिल करने का प्रस्ताव है। एक समूह का संचालन, रखरखाव और भविष्य का विकास एक ही निजी कंपनी के जिम्मे होगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और एयरपोर्ट की यात्री सुविधाओं के साथ बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया जा सकेगा।

रायपुर और औरंगाबाद एयरपोर्ट को एक समूह में रखने का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा है। प्रस्तावित पांच समूहों में अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल, वाराणसी-गया-कुशीनगर, भुवनेश्वर-हुबली, रायपुर-औरंगाबाद तथा तिरुचिरापल्ली-तिरुपति शामिल हैं। सरकार की योजना है कि बड़े और छोटे एयरपोर्ट को एक साथ जोड़कर निजी कंपनियों के लिए निवेश का संतुलित मॉडल तैयार किया जाए। इससे उन एयरपोर्ट को भी विकास का अवसर मिल सकता है, जहां अभी यात्री यातायात या व्यावसायिक गतिविधियां अपेक्षाकृत सीमित हैं।

प्रस्ताव के मुताबिक इन 11 एयरपोर्ट के संचालन और विकास के लिए निजी क्षेत्र से करीब 8,622 करोड़ रुपए के निवेश का अनुमान लगाया गया है। इस निवेश का उपयोग एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, यात्री सुविधाओं में सुधार, तकनीकी सेवाओं को मजबूत करने और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाने में किया जा सकता है। रायपुर एयरपोर्ट के लिए भी यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में औद्योगिक, व्यावसायिक और पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है।

सरकार ने पीपीपी मॉडल में बाजार के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकने पर भी ध्यान दिया है। प्रस्ताव में यह व्यवस्था रखी गई है कि एक ही बोलीदाता को सीमित संख्या में एयरपोर्ट समूह दिए जाएं। इसका उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और किसी एक कंपनी के हाथों में अत्यधिक नियंत्रण जाने से रोकना है। इसके साथ ही निजी कंपनियों की वित्तीय क्षमता और कर्ज से जुड़े जोखिमों को भी ध्यान में रखकर बोली प्रक्रिया तैयार करने की बात कही गई है।

निजी संचालन शुरू होने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई के मौजूदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी विशेष प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। निजी कंपनी को शुरुआती एक वर्ष तक संयुक्त प्रबंधन व्यवस्था के तहत काम करना होगा, ताकि संचालन का संक्रमण सुचारू तरीके से हो सके। इसके बाद कम से कम तीन वर्षों तक एएआई के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखने का प्रस्ताव रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निजीकरण की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना और एयरपोर्ट संचालन में अनुभवी मानव संसाधन की निरंतरता बनाए रखना है।

11 एयरपोर्ट के चयन के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने चरणबद्ध मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई है। पहले बड़े एयरपोर्ट का यात्री यातायात, उपलब्ध भूमि, व्यावसायिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर अध्ययन किया गया। इसके बाद छोटे एयरपोर्ट का आकलन किया गया कि उन्हें बड़े एयरपोर्ट के साथ किस प्रकार जोड़ा जा सकता है। इसी प्रक्रिया के आधार पर मौजूदा पीपीपी चरण के लिए पांच समूहों में शामिल 11 एयरपोर्ट का चयन किया गया।

रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट का प्रस्तावित पीपीपी मॉडल में शामिल होना छत्तीसगढ़ के हवाई संपर्क और भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि योजना निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में रायपुर एयरपोर्ट पर यात्री सुविधाओं, संचालन व्यवस्था और व्यावसायिक विकास के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि अंतिम रूप से निजी ऑपरेटर के चयन और संचालन की प्रक्रिया सरकार की आगे की मंजूरी और बोली प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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