रायपुर, छत्तीसगढ़
हेड लाइंस:
आईजीकेवी में अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस 2026 का आयोजन
जनजातीय अधिकारों, शिक्षा और करियर अवसरों पर हुआ मंथन
‘जल, जंगल और जमीन’ पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों को दी गई जानकारी
पर्यावरण संरक्षण में आदिवासी समुदायों की भूमिका को किया गया रेखांकित
रायपुर: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आईजीकेवी), रायपुर में अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनजातीय समुदायों के अधिकारों, शिक्षा और करियर के अवसरों को प्रमुखता से उठाया गया। विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को जनजातीय समाज से जुड़े संवैधानिक एवं सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से करियर निर्माण की संभावनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जनजातीय समुदायों की पर्यावरण संरक्षण में भूमिका और प्राकृतिक संसाधनों से उनके पारंपरिक संबंधों पर भी चर्चा हुई।
विद्यार्थी कल्याण अधिष्ठाता ने की अध्यक्षता: कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीकेवी के विद्यार्थी कल्याण अधिष्ठाता डॉ. संजय शर्मा ने की। विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार जी.के. निर्मम कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. सी.आर. नेताम को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया, जबकि संघ के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खरे विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
जनजातीय अधिकारों पर दिया जोर: कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा को महत्वपूर्ण विषय बताया। विशेष रूप से जल, जंगल और जमीन पर जनजातीय समुदायों के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों की जानकारी समुदायों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दिशा में एकजुटता और जागरूकता को आवश्यक बताया गया।
करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं की दी जानकारी: विशेष अतिथि चंद्रशेखर खरे ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को करियर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए जरूरी रणनीतियों और तैयारियों से संबंधित जानकारी साझा की। विद्यार्थियों को ARS, UPSC, CGPSC, SSC, ITI, IBPS, CGSSC, SI, ICAR, PAT, PET, NEET, CIEPET और Polytechnic सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया गया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर नियमित तैयारी करने का आह्वान किया।
शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने का संदेश: कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शिक्षा जनजातीय समाज के युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थी सरकारी सेवाओं, कृषि, तकनीकी क्षेत्रों और अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं। विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षाओं की प्रक्रिया, तैयारी की रणनीति और करियर के विकल्पों को लेकर जानकारी उपलब्ध कराना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
पर्यावरण संरक्षण में जनजातीय समाज की भूमिका: वक्ताओं ने जनजातीय समुदायों की पर्यावरण संरक्षण में भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों का जीवन लंबे समय से प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा रहा है। जंगलों, जलस्रोतों और भूमि के साथ उनका पारंपरिक संबंध पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके संतुलित उपयोग के लिए जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव को महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
एकजुटता और जागरूकता का आह्वान: कार्यक्रम में जनजातीय समुदायों के अधिकारों को लेकर अधिक जागरूकता फैलाने तथा सामाजिक स्तर पर एकजुटता बढ़ाने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि अधिकारों की जानकारी के साथ-साथ शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी मजबूत होनी चाहिए। युवाओं को अपने संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित: कार्यक्रम में डॉ. आर. भंवर, डॉ. जी.पी. आयाम, डॉ. संजय भारिया, डॉ. सुनील नाग, डॉ. रवि श्रेया और तिलक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रंग भी देखने को मिले। उपस्थित लोगों ने जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत और उसकी विशिष्ट पहचान को सम्मान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अधिकार और अवसर दोनों पर फोकस: आईजीकेवी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें केवल जनजातीय संस्कृति और अधिकारों की चर्चा तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के शिक्षा और करियर अवसरों को भी प्रमुखता दी गई। प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की जानकारी देकर युवाओं को आगे बढ़ने के संभावित रास्तों से परिचित कराया गया। वहीं जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों तथा पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया।
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