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भिलाई की ब्रिंदा राय को इतिहास में मिली पीएचडी, दुर्ग के आर्थिक विकास पर किया महत्वपूर्ण शोध…

भिलाई, दुर्ग

हेड लाइंस:

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने ब्रिंदा राय को इतिहास में पीएचडी की उपाधि प्रदान की
दुर्ग जिले के आर्थिक विकास पर 2000 से 2020 तक किया शोध
‘Role of Durg District in the Economic Development of Chhattisgarh’ विषय पर शोध
शोध में दुर्ग के आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण और समकालीन पहलुओं का किया गया अध्ययन

भिलाई: हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (HYU), दुर्ग ने ब्रिंदा राय को इतिहास विषय में पीएचडी की उपाधि प्रदान की है। उन्होंने ‘Role of Durg District in the Economic Development of Chhattisgarh (2000-2020)’ विषय पर शोध कार्य किया। यह शोध वर्ष 2000 से 2020 के बीच दुर्ग जिले की आर्थिक विकास यात्रा, उसके विभिन्न पहलुओं और छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में जिले की भूमिका पर केंद्रित रहा।

आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन: ब्रिंदा राय ने अपना शोध कार्य सेवानिवृत्त सहायक प्राध्यापक डॉ. पी.डी. सोनकर के मार्गदर्शन में पूरा किया। डॉ. सोनकर शासकीय महाविद्यालय, जामुल, भिलाई से संबद्ध रहे हैं। शोध के दौरान दुर्ग जिले के आर्थिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करते हुए वर्ष 2000 से 2020 तक के तथ्यों और आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकृत किया गया।

शोध का मूल्यांकन नागपुर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ ने किया: ब्रिंदा राय के शोध कार्य के बाह्य परीक्षक के रूप में डॉ. शामराव आई. कोरेती ने भूमिका निभाई। डॉ. कोरेती राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर, महाराष्ट्र में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं। उन्होंने शोध प्रबंध का परीक्षण करने के बाद वाइवा-व्हॉइस के दौरान शोध के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

शोध की सराहना: वाइवा के दौरान डॉ. कोरेती ने ब्रिंदा राय के शोध कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि शोध में दुर्ग जिले के आर्थिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण और समकालीन पहलुओं को शामिल किया गया है। साथ ही वर्ष 2000 से 2020 के बीच आर्थिक विकास से संबंधित तथ्यों को व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध तरीके से दस्तावेजीकृत किया गया है। शोध में संबंधित अवधि के दौरान जिले में हुए आर्थिक बदलावों और विकास की प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया गया है।

दुर्ग के विकास को ऐतिहासिक दृष्टि से समझने का प्रयास: इतिहास विषय में किया गया यह शोध दुर्ग जिले के आर्थिक विकास को एक निर्धारित कालखंड के संदर्भ में समझने का प्रयास करता है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद राज्य के विभिन्न जिलों की आर्थिक भूमिका और विकास प्रक्रिया में बदलाव आए। ऐसे में दुर्ग जिले की 2000 से 2020 तक की आर्थिक यात्रा का अध्ययन क्षेत्रीय इतिहास और आर्थिक विकास के परिप्रेक्ष्य से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

शोध से जुड़े दस्तावेजों का व्यवस्थित अध्ययन: शोध के दौरान उपलब्ध तथ्यों और संबंधित सामग्री को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया। दो दशक की अवधि को आधार बनाकर किए गए अध्ययन में दुर्ग जिले के आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। शोध का विषय छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में दुर्ग जिले की भूमिका पर केंद्रित होने के कारण क्षेत्रीय इतिहास, अर्थव्यवस्था और विकास के अध्ययन से भी जुड़ता है।

पीएचडी उपाधि से शैक्षणिक उपलब्धि: ब्रिंदा राय को पीएचडी की उपाधि मिलना उनके शोध और अकादमिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इतिहास विषय में किए गए इस शोध के माध्यम से उन्होंने दुर्ग जिले के आर्थिक विकास से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय का अध्ययन किया। उनके शोध कार्य में दो दशक की अवधि के दौरान जिले की आर्थिक भूमिका और विकास से संबंधित तथ्यों को संकलित एवं विश्लेषित किया गया।

दुर्ग के आर्थिक इतिहास पर शोध का महत्व: किसी क्षेत्र के विकास को समझने के लिए उसके सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों का अध्ययन महत्वपूर्ण होता है। दुर्ग छत्तीसगढ़ का प्रमुख औद्योगिक एवं आर्थिक क्षेत्र रहा है। ऐसे में जिले के आर्थिक विकास को 2000 से 2020 तक के कालखंड में अध्ययन का विषय बनाना क्षेत्रीय इतिहास और आर्थिक विकास से जुड़े शोध के लिए उपयोगी आधार प्रदान करता है। ब्रिंदा राय का शोध इसी दिशा में एक अकादमिक प्रयास के रूप में सामने आया है।

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