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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के दो हफ्ते बाद तोड़ी चुप्पी, बोले- NEET विरोध के दौरान Gen-Z को गुमराह करने की कोशिश हुई…

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हेड लाइंस
25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से दिया था इस्तीफा
पहली बार सार्वजनिक रूप से इस्तीफे की वजह पर बोले धर्मेंद्र प्रधान
NEET विवाद के विरोध-प्रदर्शनों में युवाओं को गुमराह करने का लगाया आरोप
कहा- मंत्री पद मेरे लिए कभी व्यक्तिगत प्राथमिकता नहीं रहा
ओडिशा में ‘वापस जाओ’ के नारों पर भी दिया जवाब

भुवनेश्वर, ओडिशा: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के करीब दो सप्ताह बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। 9 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर की जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि NEET विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान Gen-Z यानी युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री पद उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या प्राथमिकता का विषय नहीं था।

इस्तीफे को लेकर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान: प्रधान ने कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क कर पद से हटने की पेशकश की थी। इसके बाद 25 जुलाई को उन्होंने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया। उनके मुताबिक, उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों और देश के युवाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया। इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी वजह को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अब प्रधान ने स्वयं अपना पक्ष सामने रखा है।

NEET विवाद और युवाओं को लेकर कही बड़ी बात: धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि Gen-Z देश की युवा पीढ़ी है, जिसकी अपनी उम्मीदें और महत्वाकांक्षाएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों ने युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने देश में बड़ी संख्या में जन्म लेने वाले बच्चों और आने वाले वर्षों में युवा आबादी की भूमिका का भी उल्लेख किया।

‘मेरे लिए मंत्री पद महत्वपूर्ण नहीं था’: पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कभी व्यक्तिगत प्राथमिकता नहीं रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। प्रधान का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनके इस्तीफे को लेकर करीब दो सप्ताह से राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चाएं चल रही थीं।

ओडिशा में ‘वापस जाओ’ के नारों पर भी बोले: धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के रायराखोल में अपने खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। बीजू जनता दल के युवा और छात्र कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए ‘धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ’ के नारों पर उन्होंने कहा कि वह ऐसे विरोध से परेशान नहीं हैं। खुद को किसान का बेटा बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि लोग उन्हें वापस जाने के लिए कहते हैं तो वह वापस आएंगे।

नवीन पटनायक पर भी साधा निशाना: प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों में युवाओं को शामिल किया गया। प्रधान ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा होना पड़े और भविष्य में भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे।

12 साल पहले बने थे केंद्रीय मंत्री: धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 12 वर्ष पहले भगवान जगन्नाथ और संबलपुर की आराध्य देवी मां समलेश्वरी के आशीर्वाद से वह केंद्रीय मंत्री बने थे। शिक्षा मंत्री का पद छोड़ने के बाद उनका यह पहला बड़ा सार्वजनिक बयान है, जिसमें उन्होंने इस्तीफे की परिस्थितियों के साथ-साथ NEET विवाद, युवाओं और ओडिशा की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

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