रायपुर, छत्तीसगढ़।
बुआई-कटाई के दौरान खेतों में मजदूरों की कमी न हो, इसलिए सरकार ने लिया फैसला, अलग-अलग कृषि क्षेत्रों के लिए तय की प्रतिबंधित अवधि
हेड लाइंस
खेती के चरम मौसम में ग्रामीण रोजगार योजना के कामों पर रोक
1 नवंबर से 15 नवंबर तक खरीफ कटाई के दौरान नहीं होंगे नए काम
रबी बुआई के लिए 16 से 30 नवंबर और कटाई के लिए 16 से 30 मार्च तक रोक
प्राकृतिक आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार दे सकेगी छूट
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने खेती के चरम मौसम में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत होने वाले कार्यों पर रोक लगाने का फैसला किया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 3 अगस्त को अधिसूचना जारी कर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बुआई और कटाई के पीक एग्रीकल्चरल सीजन को अधिसूचित किया है। इन अवधियों में विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के तहत कोई नया काम शुरू, स्वीकृत या संचालित नहीं किया जाएगा।
1 जुलाई 2026 से लागू हुई नई योजना
यह व्यवस्था उस कानून और राज्य योजना के प्रावधानों के तहत लागू की गई है, जिसके तहत वर्ष 2025 में मनरेगा की जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) लागू किया गया। छत्तीसगढ़ में नई योजना 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अधिसूचित कृषि मौसम के दौरान ग्राम पंचायतों में योजना का कोई नया कार्य प्रारंभ नहीं किया जाए।
जुलाई की बुआई अवधि क्यों नहीं हुई अधिसूचित
अधिसूचना में बताया गया है कि योजना 1 जुलाई 2026 से लागू हुई, जबकि खरीफ फसलों की बुआई का चरम समय 1 से 15 जुलाई तक था। योजना लागू होने से पहले ही यह अवधि गुजर चुकी थी, इसलिए जुलाई की बुआई अवधि को अधिसूचित नहीं किया गया। ग्राम पंचायत विकास योजना और वार्षिक श्रम मांग तैयार करते समय भी कार्यों को प्रतिबंधित अवधि से बाहर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
1 नवंबर से 15 नवंबर तक खरीफ कटाई पर रोक
छत्तीसगढ़ मैदानी क्षेत्र के 20 जिले, बस्तर पठार के 7 जिले और सरगुजा उत्तरी क्षेत्र के 6 जिलों के लिए कृषि कार्यों का कैलेंडर निर्धारित किया गया है। इन क्षेत्रों में खरीफ फसलों की कटाई का चरम मौसम 1 नवंबर से 15 नवंबर, रबी फसलों की बुआई 16 नवंबर से 30 नवंबर और रबी फसलों की कटाई 16 मार्च से 30 मार्च तक मानी गई है। इन अवधि में योजना के तहत नए कार्य शुरू नहीं होंगे।
किन फसलों को बनाया गया आधार
कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग फसल प्रणालियों को आधार बनाया गया है। मैदानी क्षेत्रों में धान, मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन जैसी खरीफ फसलों के साथ गेहूं, चना, सरसों, अलसी और सब्जियों को शामिल किया गया है। बस्तर क्षेत्र में कोदो, कुटकी और रागी जैसी पारंपरिक फसलों को भी ध्यान में रखा गया है, जबकि सरगुजा क्षेत्र के लिए स्थानीय कृषि पैटर्न को आधार बनाया गया है।
मजदूरी और क्षतिपूर्ति भुगतान पर रोक नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित अवधि में बेरोजगारी भत्ता, मजदूरी में देरी पर देय क्षतिपूर्ति, प्रशासनिक व्यय और योजना संचालन से जुड़े भुगतान जारी रहेंगे। प्राकृतिक आपदा या अन्य असाधारण परिस्थितियों में राज्य सरकार की अनुशंसा पर केंद्र सरकार इन प्रतिबंधों में छूट भी दे सकती है।
किसानों को मजदूरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद
सरकार का मानना है कि बुआई और कटाई के दौरान कृषि कार्यों के लिए मजदूरों की मांग सबसे अधिक रहती है। ऐसे समय में ग्रामीण रोजगार योजना के काम संचालित होने से कृषि मजदूरों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कृषि कार्य और ग्रामीण रोजगार योजना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। हालांकि, प्रतिबंधित अवधि के बाहर ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।
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