NEW DELHI
नई दिल्ली। NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञों ने अपनी गोपनीय पहुंच का कथित दुरुपयोग कर परीक्षा के प्रश्न याद किए, कॉपी किए और बिचौलियों के माध्यम से उम्मीदवारों तक पहुंचाए। मामले में WhatsApp, Telegram, PDF फाइलों और मोबाइल फोन के जरिए संचालित डिजिटल नेटवर्क का भी खुलासा हुआ है।
हेड लाइंस
• CBI की चार्जशीट में 13 आरोपी, NTA के 3 एक्सपर्ट्स भी शामिल
• बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स विशेषज्ञों पर प्रश्न बाहर ले जाने का आरोप
• WhatsApp, Telegram, PDF और मोबाइल डेटा से डिजिटल नेटवर्क का दावा
• CCTV बैकअप और फ्रिस्किंग व्यवस्था की कमी पर उठे सवाल
• 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला
चार्जशीट में 13 आरोपियों के नाम
नई दिल्ली। CBI ने दिल्ली की विशेष CBI अदालत (रूज एवेन्यू कोर्ट) में दाखिल चार्जशीट में कुल 13 आरोपियों को नामजद किया है। इनमें NTA के तीन विषय विशेषज्ञों के अलावा कुछ उम्मीदवार, बिचौलिये और निजी कोचिंग संचालक शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रश्न पत्र कई स्तरों से गुजरते हुए उन अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए, जिन्होंने इसके लिए धनराशि चुकाई। चार्जशीट के अनुसार मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की गई है।
NTA के तीन विशेषज्ञों पर गंभीर आरोप
CBI ने चार्जशीट में बॉटनी विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे, केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार का नाम लिया है। एजेंसी का आरोप है कि इन तीनों को प्रश्नपत्र के अनुवाद, बैक-ट्रांसलेशन और प्रूफरीडिंग का कार्य सौंपा गया था। जांच में दावा किया गया है कि इसी गोपनीय पहुंच का इस्तेमाल कर प्रश्नों को याद किया गया, रफ शीट पर लिखा गया या बाद में पुनः तैयार कर बिचौलियों तक पहुंचाया गया।
सुरक्षा व्यवस्था में कथित खामियों का उठाया फायदा
चार्जशीट के अनुसार NTA के कॉन्फिडेंशियल सेक्शन में प्रवेश और निकास के दौरान नियमित फ्रिस्किंग (तलाशी) की व्यवस्था नहीं थी। CBI का आरोप है कि इसी कमजोरी का लाभ उठाकर कुछ प्रश्नों को छोटी पर्चियों पर लिखकर बाहर ले जाया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि आसान प्रश्नों को याद कर बाद में लिखने की भी आशंका है। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि CCTV फुटेज का बैकअप केवल 20 से 25 दिनों तक उपलब्ध रहता था। चूंकि गोपनीय कार्य अप्रैल में पूरा हो गया था और मामला मई में दर्ज हुआ, इसलिए कथित घटनाओं का वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिल सका।
WhatsApp, Telegram और PDF के जरिए फैला नेटवर्क
CBI के अनुसार प्रश्न सीधे उम्मीदवारों तक नहीं पहुंचे, बल्कि बिचौलियों के माध्यम से एक संगठित डिजिटल नेटवर्क के जरिए प्रसारित किए गए। जब्त मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में PDF फाइलें, प्रश्नपत्रों की तस्वीरें, WhatsApp चैट, Telegram संदेश, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन डेटा बरामद होने का दावा किया गया है। चार्जशीट में यश यादव के मोबाइल से कथित प्रश्नपत्रों की PDF मिलने तथा “AP Broker” नामक Telegram संपर्क के जरिए नेटवर्क संचालित होने का उल्लेख किया गया है। वहीं एक अन्य आरोपी के मोबाइल में “NEET 2026” नाम का WhatsApp ग्रुप मिलने का भी दावा किया गया है।
कोचिंग क्लास और छात्रों तक पहुंचने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा से पहले पुणे में कुछ विशेष कोचिंग क्लास आयोजित की गईं, जिनमें छात्रों को संभावित प्रश्न बताए गए। CBI के अनुसार विजिटर एंट्री रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक डेटा, कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन विश्लेषण के आधार पर इन बैठकों की पुष्टि करने का प्रयास किया गया। चार्जशीट में यह भी आरोप है कि एक उम्मीदवार की मां को फिजिक्स के 68 प्रश्नों वाले 16 पन्नों का सेट उपलब्ध कराया गया था।
360 गवाह और 422 दस्तावेज बनाए गए आधार
CBI ने अपने आरोपों के समर्थन में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला दिया है। एजेंसी का दावा है कि उपलब्ध साक्ष्य NTA के कुछ विषय विशेषज्ञों, बिचौलियों, निजी कोचिंग संचालकों और कुछ उम्मीदवारों के बीच कथित साजिश की ओर संकेत करते हैं। चार्जशीट में नामजद सभी 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में बताए गए हैं। अब मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में CBI द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच होगी। यह ध्यान देने योग्य है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय के विचारण के बाद ही होगा।
खबरें और भी…

