रायपुर, छत्तीसगढ़
कारोबार में पार्टनरशिप और दोगुना मुनाफा दिलाने का झांसा देकर सगे भाई पर अपनी बहन और जीजा से करीब 1.25 करोड़ रुपये की कथित ठगी करने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं, फर्जी हस्ताक्षर कर दोनों को साझेदारी फर्म से बाहर दिखाने का मामला भी सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
हेड लाइंस
• कारोबार में निवेश के नाम पर 1.25 करोड़ रुपये की कथित ठगी
• फर्जी हस्ताक्षर कर पार्टनरशिप फर्म से हटाने का आरोप
• RTI से सामने आया कथित फर्जीवाड़ा, पुलिस ने दर्ज किया केस
रायपुर: मामला राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार नागपुर निवासी मनोवैज्ञानिक काउंसलर शिवांगी गर्ग ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके भाई शुभम सिंघल और भाभी जया सिंघल ने कारोबार के विस्तार और दोगुना मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर वर्ष 2020 से अलग-अलग समय में उनसे और उनके पति से करीब 1.25 करोड़ रुपये का निवेश कराया। शुरुआत में विश्वास बनाए रखने के लिए मुनाफे के नाम पर कुछ रकम भी उनके खाते में भेजी जाती रही।
रकम मांगने पर बनाया पार्टनर, फिर हटाने का आरोप
शिकायत के अनुसार जब निवेश की गई राशि वापस मांगी गई तो 4 अप्रैल 2025 को दंपती को अधिराज सीमेंट और अधिराज ट्रेडलिंक नामक साझेदारी फर्मों में भागीदार बनाया गया। आरोप है कि इसके बाद मुनाफे का भुगतान बंद कर दिया गया। जनवरी 2026 में रायपुर में हुई पारिवारिक बैठक में रकम लौटाने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
RTI से खुला कथित फर्जीवाड़ा
पीड़िता ने रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज प्राप्त किए। दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि 6 मार्च और 6 अप्रैल 2026 की पार्टनरशिप डीड में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर कर शिवांगी गर्ग और उनके पति को दोनों फर्मों से सेवानिवृत्त (रिटायर) दिखा दिया गया। पीड़िता का दावा है कि दोनों तारीखों पर वह रायपुर में मौजूद ही नहीं थीं।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायत के आधार पर तेलीबांधा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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