हेड लाइंस
• OFS के जरिए सरकारी हिस्सेदारी घटाने के विरोध में बीमाकर्मियों का प्रदर्शन
• रायपुर मंडल कार्यालय में हुई विरोध सभा, ट्रेड यूनियनों ने सरकार पर साधा निशाना
• 10 अगस्त को राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन की चेतावनी
• एलआईसी के राष्ट्रीयकृत स्वरूप को बनाए रखने की उठी मांग
रायपुर, छत्तीसगढ़: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से केंद्र सरकार की हिस्सेदारी कम किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में गुरुवार को रायपुर सहित देशभर में बीमाकर्मियों ने प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन (AIIEA) के आह्वान पर एलआईसी के विभिन्न कार्यालयों के बाहर गेट प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित की गईं। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से एलआईसी में 100 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने की मांग की।
रायपुर में हुई विरोध सभा, नेताओं ने रखे विचार
रायपुर मंडल कार्यालय में आयोजित विरोध सभा को पूर्व सांसद एवं सेंटर ऑफ ट्रेड यूनियंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड तपन सेन ने संबोधित किया। उन्होंने बीमाकर्मियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में अपनी हिस्सेदारी लगातार कम कर रही है। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों के लिए बीमा क्षेत्र खोले जाने के बावजूद एलआईसी आज भी देश की सबसे बड़ी और अग्रणी बीमा कंपनी बनी हुई है। उनके अनुसार कर्मचारियों की एकजुटता और संगठन की भूमिका से एलआईसी ने यह स्थान हासिल किया है।
10 अगस्त को जेल भरो आंदोलन का ऐलान
ट्रेड यूनियन नेताओं ने घोषणा की कि 10 अगस्त को देशभर में राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन आयोजित कर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और बीमा जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में निजीकरण की नीति से कर्मचारियों और आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने नई भर्तियों में तेजी लाने और सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करने की भी मांग की।
एलआईसी की भूमिका और सरकार के फैसले पर सवाल
AIIEA के राष्ट्रीय अध्यक्ष कामरेड धर्मराज महापात्र ने कहा कि सरकार OFS के माध्यम से एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी और कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि मई 2022 में आईपीओ के जरिए सरकार 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच चुकी है। उनके अनुसार एलआईसी देश के लगभग 29 करोड़ पॉलिसीधारकों की बचत का प्रबंधन करती है, करीब 59 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का संचालन करती है तथा जुलाई 2026 में सरकार को 12,207 करोड़ रुपये का लाभांश भी प्रदान कर चुकी है।
पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एलआईसी दुनिया की प्रमुख सार्वजनिक बीमा संस्थाओं में शामिल है और इसकी उपलब्धियों के बावजूद केवल राजकोषीय जरूरतों के लिए सरकारी हिस्सेदारी बेचना उचित नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे करोड़ों पॉलिसीधारकों के हित प्रभावित हो सकते हैं। बीमाकर्मियों ने एलआईसी के राष्ट्रीयकृत स्वरूप की रक्षा के लिए देशभर में आंदोलन को और व्यापक बनाने का संकल्प दोहराया।
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