हेड लाइंस
• मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर पुलिस व्यवस्था में सुधार की मांग
• रायपुर कमिश्नरेट में पुलिस बल की भारी कमी का मुद्दा उठाया
• 660 रिक्त पदों पर भर्ती और 500 अतिरिक्त जवानों की तैनाती की मांग
• ट्रैफिक पुलिस, कार्यालय भवन और संसाधनों की कमी पर जताई चिंता
रायपुर, छत्तीसगढ़: राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था और पुलिस संसाधनों को लेकर भाजपा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर पुलिस बल की कमी, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली, ट्रैफिक पुलिस की कमजोर स्थिति तथा बुनियादी संसाधनों के अभाव पर चिंता व्यक्त की है। सांसद ने व्यवस्था में तत्काल सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं।
कमिश्नरेट व्यवस्था पर उठाए सवाल
18 जुलाई 2026 को लिखे गए पत्र में सांसद ने कहा कि रायपुर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने का उद्देश्य कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना था, लेकिन अधिकारियों की संख्या बढ़ने के बावजूद आरक्षक, प्रधान आरक्षक, उपनिरीक्षक सहित मैदानी पुलिस बल की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इससे कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिस दोनों को प्रभावी ढंग से काम करने में कठिनाई हो रही है।
शहरी क्षेत्रों को कमिश्नरेट में शामिल करने की मांग
पत्र में सांसद ने बताया कि रायपुर नगर निगम के कई पूर्णतः शहरी क्षेत्र अब भी ग्रामीण पुलिस के अधिकार क्षेत्र में हैं। इनमें महात्मा गांधी वार्ड, मोतीलाल नेहरू वार्ड के हिस्से, अमर सिंह बस्ती, स्वर्णभूमि कॉलोनी, शिवाजी पार्क, राजधानी विहार, पीएम आवास योजना क्षेत्र, सत्यम नगर, कचना और डूमरतराई जैसे इलाके शामिल हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों को जल्द रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के अधीन लाने की मांग की है। साथ ही स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट और सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र को भी कमिश्नरेट के दायरे में शामिल करने का सुझाव दिया है, ताकि पुलिस समन्वय बेहतर हो सके।
660 पद खाली, 500 अतिरिक्त जवानों की मांग
सांसद ने अपने पत्र में बताया कि संयुक्त रक्षित केंद्र में 660 से अधिक पद रिक्त हैं, जिनमें 522 आरक्षक, 43 प्रधान आरक्षक, 82 उपनिरीक्षक, 9 सहायक उपनिरीक्षक और 4 सूबेदार के पद शामिल हैं। उन्होंने इन रिक्तियों पर शीघ्र भर्ती कराने और तत्काल राहत के लिए अन्य जिलों से 500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की अस्थायी तैनाती रायपुर में किए जाने की मांग की है।
ट्रैफिक और संसाधनों की कमी पर चिंता
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2016 में रायपुर की आबादी लगभग 15 लाख थी, जो अब 25 लाख से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद ट्रैफिक शाखा में केवल 46 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जिससे यातायात व्यवस्था संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कमिश्नरेट गठन के बाद अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पांच डीसीपी और 18 एसीपी के पद तो स्वीकृत हुए, लेकिन उनके लिए पर्याप्त कार्यालय भवन और सरकारी वाहनों की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
राजनीतिक संदेश भी चर्चा में
हालांकि सांसद ने अपने पत्र को राजधानी की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह पत्र कई सवाल भी खड़े कर रहा है। सत्ता और सांसद दोनों एक ही दल से होने के बावजूद सरकार को इस तरह पत्र लिखकर व्यवस्था में सुधार की मांग ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
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