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होर्मुज स्ट्रेट फिर खुल सकता है! अमेरिका-ईरान के बीच अहम बातचीत, वैश्विक तेल कारोबार को मिल सकती है राहत…

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हेड लाइंस
• होर्मुज स्ट्रेट को फिर खोलने पर अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत तेज
• अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा- आज या कल हो सकती है अहम डील
• कमर्शियल जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर
• वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बाद बंद हुए रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने के लिए बातचीत जारी है और इस संबंध में समझौता आज या अगले 24 घंटे के भीतर हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी।

बातचीत से सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद
स्कॉट बेसेंट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना सभी पक्षों के हित में है। उनके अनुसार प्रस्तावित समझौते का मुख्य उद्देश्य कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता सफल होता है तो क्षेत्र में तनाव कम होने और सामान्य स्थिति बहाल होने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। हालांकि इससे पहले ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अमेरिका के साथ किसी औपचारिक वार्ता की प्रक्रिया नहीं चल रही है।

टोल टैक्स के सवाल पर नहीं दिया स्पष्ट जवाब
जब स्कॉट बेसेंट से पूछा गया कि क्या भविष्य में ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाएगा, तो उन्होंने इस पर सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना है और बाकी मुद्दों पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती।

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम जलमार्ग
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचती है। ऐसे में इस जलमार्ग पर किसी भी तरह का तनाव या बाधा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर टिकी हुई हैं।

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