रायपुर | छत्तीसगढ़
बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल बुधवार रात रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। रिहाई के बाद उन्होंने महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
हेड लाइंस
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अमित बघेल रिहा
रिहाई के बाद महापुरुषों की प्रतिमाओं पर किया माल्यार्पण
समर्थकों ने पटाखे फोड़कर मनाई खुशी
2028 में छत्तीसगढ़ियावादी सरकार बनने का किया दावा
बलौदाबाजार हिंसा मामले में दिसंबर 2025 से थे न्यायिक हिरासत में
रायपुर: जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल बुधवार रात रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई। जेल से बाहर निकलते ही उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। इसके बाद छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर हाथ में लेकर जेल परिसर से बाहर आए। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनका स्वागत किया और पटाखे फोड़कर खुशी जताई।
2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर किया दावा
रिहाई के बाद अमित बघेल ने कहा कि वर्ष 2028 में छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ियावादी सरकार बनेगी। उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी वे प्रदेश से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे। अमित बघेल 5 दिसंबर 2025 से रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में थे।
बलौदाबाजार हिंसा मामला क्या है
10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा भड़क गई थी। आरोप है कि रैली के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण के बाद भीड़ उग्र हो गई और कलेक्ट्रेट व एसपी कार्यालय परिसर में तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं हुईं। इस दौरान कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा और ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों एवं जवानों पर भी हमला किया गया, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। इसी मामले में अमित बघेल के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।
अन्य मामलों में भी दर्ज हैं प्रकरण
अक्टूबर 2025 में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा से जुड़े विवाद के दौरान अमित बघेल के एक बयान को लेकर अग्रवाल और सिंधी समाज की ओर से विरोध प्रदर्शन किए गए थे। इस मामले में राजधानी के कोतवाली और देवेंद्र नगर थाने में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। हालांकि, वर्तमान रिहाई बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत के आधार पर हुई है।
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