धर्म | भारत
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के समापन पर भड़ली नवमी का विशेष महत्व, श्रद्धालु देवी दुर्गा की आराधना कर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
हेड लाइंस
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन माना जाता है भड़ली नवमी
देवी दुर्गा को लाल चुनरी अर्पित करने की है विशेष मान्यता
छोटी कन्याओं को भोजन कराने और दक्षिणा देने का बताया गया महत्व
भक्ति, जप, दान और पूजा से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन भड़ली नवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी को लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री और पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। गुप्त नवरात्रि की समाप्ति पर देवी आराधना का विशेष फल मिलने की मान्यता है।
विशेष पूजा का महत्व
धार्मिक परंपराओं के अनुसार भड़ली नवमी पर छोटी कन्याओं को भोजन कराना, उनका सम्मान करना और यथाशक्ति दक्षिणा या उपहार देना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन दुर्गा चालीसा, देवी मंत्रों का जप तथा पूजा-पाठ कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
श्रद्धा और सेवा का संदेश
भक्त इस दिन पूरे श्रद्धाभाव के साथ देवी दुर्गा की उपासना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची आस्था, सेवा और दान-पुण्य के साथ की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का संचार होता है। धार्मिक आयोजनों में कन्या पूजन और प्रसाद वितरण का भी विशेष महत्व माना जाता है।
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