बिलासपुर | छत्तीसगढ़
बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच लगातार गहराती जा रही है। पुलिस ने इस बहुचर्चित मामले में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 431 फर्जी मौतें दिखाकर करीब 17.24 करोड़ रुपये की सरकारी मुआवजा राशि के गबन की आशंका सामने आई है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
हेड लाइंस
• सर्पदंश मुआवजा घोटाले में तीन और आरोपी गिरफ्तार
• 431 फर्जी मौतें दिखाकर 17.24 करोड़ रुपये की निकासी का आरोप
• सिम्स की डॉक्टर और तीन क्लर्क सहित कई लोग जांच के घेरे में
• 16 प्रकरणों की जांच जारी, और गिरफ्तारियों की संभावना
बिलासपुर। सर्पदंश से मृत्यु पर मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में हुए कथित फर्जीवाड़े की जांच में पुलिस को लगातार नए सुराग मिल रहे हैं। ताजा कार्रवाई में तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, फर्जी दस्तावेजों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए सर्पदंश से मौत दर्शाकर सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराया गया। अब तक की जांच में 431 संदिग्ध मामलों के माध्यम से करीब 17.24 करोड़ रुपये की सहायता राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेजों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि कई मामलों में वास्तविक मृत्यु के कारणों को बदलकर सर्पदंश से मौत दर्शाई गई। आरोप है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सरकारी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज तैयार कर मुआवजा स्वीकृत कराया गया। इस मामले में सिम्स से जुड़ी एक डॉक्टर और राजस्व विभाग के क्लर्कों सहित कई लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से लंबे समय से संचालित किया जा रहा था।
16 प्रकरणों की जांच जारी
बिलासपुर पुलिस ने बताया कि फिलहाल 16 प्रकरणों की विस्तृत जांच जारी है। जांच का दायरा फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने से लेकर मुआवजा स्वीकृति, भुगतान और संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं तक बढ़ाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
पूरे रैकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस
पुलिस और प्रशासन मामले में वित्तीय लेनदेन, सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घोटाले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जाएगी और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
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