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बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजे का बड़ा घोटाला, आत्महत्या को बताया सांप का काटना; बाबू, डॉक्टर और वकील समेत कई गिरफ्तार…

बिलासपुर | छत्तीसगढ़

बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा योजना में करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि आत्महत्या से हुई मौतों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए सर्पदंश से हुई मौत दिखाकर सरकारी सहायता राशि निकाली गई। मामले में तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

हेड लाइंस
• सर्पदंश मुआवजे के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर
• आत्महत्या के मामलों को सांप के काटने से मौत बताकर निकाली सहायता राशि
• बाबू, डॉक्टर और अधिवक्ता समेत कई आरोपी गिरफ्तार
• पुलिस अब पूरे नेटवर्क और भुगतान प्रक्रिया की जांच में जुटी

बिलासपुर। जिले में सर्पदंश से मौत पर मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि आत्महत्या के पुराने मामलों को सर्पदंश से हुई मौत बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार किए गए। इन्हीं कागजातों के आधार पर शासन से मिलने वाली चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि निकाल ली गई। पुलिस के अनुसार, कई मामलों में सहायता राशि लेने वाले व्यक्तियों के नाम और पते भी फर्जी पाए गए हैं।

फर्जी दस्तावेजों से सरकारी खजाने को लगाया चूना

प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपियों ने पुराने मर्ग प्रकरणों के नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कराई। दस्तावेजों में मौत का कारण सर्पदंश दर्शाया गया और फिर आरबीसी 6-4 के तहत मिलने वाली सहायता राशि स्वीकृत करवा ली गई। इस पूरे फर्जीवाड़े में सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों का दुरुपयोग किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

कई आरोपी गिरफ्तार, संगठित नेटवर्क की आशंका

सरकंडा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल थे।

विधानसभा में उठे सवाल के बाद खुला मामला

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने वर्ष 2019 से 2023 के बीच सर्पदंश मुआवजा वितरण को लेकर विधानसभा में सवाल उठाए और जांच की मांग की। इसके बाद हुई जांच में कई संदिग्ध प्रकरण सामने आए, जिनमें सामान्य और आत्महत्या से हुई मौतों को सर्पदंश से हुई मौत दर्शाकर फाइलें तैयार की गई थीं।

17 फर्जी प्रकरण सामने आए, जांच जारी

बिलासपुर एसएसपी रजनीश सिंह के अनुसार, अब तक जिले में 17 फर्जी सर्पदंश मुआवजा प्रकरण सामने आ चुके हैं। ये मामले सरकंडा, तोरवा, सिविल लाइन और बिल्हा थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। पुलिस अब फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मुआवजा स्वीकृति और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। वहीं कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि मामले में जिसकी भी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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