मुंबई / महाराष्ट्र
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा ऐलान, 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के पुराने बिजली बिल होंगे पूरी तरह माफ, किसानों को मिलेगी दिन में मुफ्त बिजली।
हेड लाइन्स
- महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के 48 हजार करोड़ रुपये के बिजली बिल माफ करने की घोषणा की।
- 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के पुराने बकाया बिजली बिल होंगे समाप्त।
- सरकार हर वर्ष 25 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देगी।
- किसानों को दिन में 8 से 12 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी।
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी आर्थिक राहत देते हुए 48 हजार करोड़ रुपये के बकाया कृषि बिजली बिल माफ करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य के 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के सभी पुराने बिजली बिल पूरी तरह माफ किए जाएंगे। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को पुराने बकाये के बोझ से मुक्त कर नई शुरुआत का अवसर देना है, ताकि वे बिना किसी वित्तीय बाधा के नए बिजली कनेक्शन और कृषि कार्यों का लाभ उठा सकें।
सरकार उठाएगी वित्तीय भार, किसानों पर नहीं पड़ेगा बोझ
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिजली बिल माफी का वित्तीय भार आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। राज्य सरकार बिजली वितरण कंपनी को सहायता देने के लिए हर वर्ष 25 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराएगी। इससे कृषि क्षेत्र को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी संतुलित बनी रहेगी।
दिन में मिलेगी 8 से 12 घंटे मुफ्त बिजली
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को रात के बजाय दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 76 प्रतिशत किसानों को दिन में बिजली मिल रही है और वर्ष के अंत तक इसे 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सौर ऊर्जा आधारित योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रतिदिन 8 से 12 घंटे तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।
कर्जमाफी के नियमों में भी दी गई बड़ी राहत
सरकार ने किसानों की ऋण सुविधा को आसान बनाने के लिए फसल ऋण माफी योजना के मानदंडों में भी बदलाव किया है। दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी और नियमित ऋण चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने से जुड़ी पूर्व शर्तों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिलेगा और कृषि क्षेत्र को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
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