नई दिल्ली / भारत /रायपुर
केंद्र सरकार ने मान्यता प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट संचालित करने वाले संस्थानों को कानूनी स्थिति नियमित करने का सुनहरा अवसर दिया, बकाया और दंडात्मक कार्रवाई से भी मिलेगी राहत।
मुख्य बिंदु
- ईपीएफओ ने प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों के लिए ‘एमनेस्टी स्कीम-2026’ लागू की।
- पात्र संस्थानों को नियमों के अनुरूप होने के लिए छह महीने का समय।
- बकाया, हर्जाने और ब्याज से जुड़ी कानूनी कार्रवाई में मिलेगी राहत।
- ट्रस्टों को पिछली तारीख से नियमित कराने का अवसर।
नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने मान्यता प्राप्त भविष्य निधि (पीएफ) ट्रस्ट संचालित करने वाले संस्थानों के लिए ‘एमनेस्टी स्कीम-2026’ लागू कर दी है। केंद्र सरकार की इस पहल का उद्देश्य ऐसे नियोक्ताओं और संस्थानों को अपनी कानूनी स्थिति नियमित करने का अवसर देना है, जो अब तक भविष्य निधि से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप पूरी तरह पंजीकृत या छूट प्राप्त नहीं थे। 29 जून 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार यह योजना छह महीने तक प्रभावी रहेगी।
नई व्यवस्था से ट्रस्टों को मिलेगा कानूनी संरक्षण
वित्त अधिनियम 2026 के तहत आयकर अधिनियम और कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम, 1952 के प्रावधानों में समन्वय स्थापित किया गया है। अब आयकर अधिनियम के तहत मान्यता केवल उन्हीं भविष्य निधि ट्रस्टों को मिलेगी जिन्हें भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत औपचारिक छूट प्राप्त होगी। पात्र संस्थानों को पिछली तिथि से नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा, जिससे उनकी कानूनी स्थिति मजबूत होगी।
दो श्रेणियों में मिलेगा योजना का लाभ
ईपीएफओ ने योजना के लिए संस्थानों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट को पिछली तिथि से नियमित कराना चाहते हैं और सामान्य भविष्य निधि व्यवस्था का पालन कर रहे हैं या करने का विकल्प चुन रहे हैं। दूसरी श्रेणी में वे संस्थान हैं जो नियमितीकरण के साथ भविष्य में भी छूट प्राप्त प्रतिष्ठान के रूप में अपनी गतिविधियां जारी रखना चाहते हैं। इससे संस्थानों को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी।
बकाया और कानूनी कार्रवाई से मिलेगी राहत
इस योजना के तहत ट्रस्टों को कई महत्वपूर्ण राहतें दी गई हैं। ट्रस्ट की स्थापना से निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक की मान्यता को पिछली तिथि से नियमित किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या और कॉर्पस से जुड़े कुछ नियमों में भी छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा यदि कर्मचारियों के खातों में निर्धारित या उससे अधिक ब्याज और अंशदान जमा किया गया है तो बकाया, हर्जाना, ब्याज और लंबित कानूनी या आकलन संबंधी कार्यवाहियां वापस ली जा सकेंगी।
जल्द आवेदन करने की अपील
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र संस्थानों को केंद्र सरकार के नाम संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन भेजना होगा। इच्छुक नियोक्ता अपनी रुचि ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ के माध्यम से ईपीएफओ की निर्धारित ईमेल आईडी पर भी दर्ज करा सकते हैं। साथ ही चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट कराना और आवेदन के तीन महीने के भीतर आवश्यक अनुपालन ऑडिट पूरा करना अनिवार्य होगा। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त जयवदन इंगले ने सभी पात्र ट्रस्टों और नियोक्ताओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन कर इस विशेष योजना का लाभ उठाएं।
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