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सिम्स की अव्यवस्थाओं पर हाई कोर्ट सख्त, कहा– जमीनी हकीकत छिपाकर न करें गुमराह…

बिलासपुर / छत्तीसगढ़

शपथ पत्र में गड़बड़ी पर उठे सवाल, मशीनों की खरीदी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में ।
हेडलाइन्स
सिम्स की बदहाल व्यवस्था पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
एआई से तैयार शपथ पत्र होने की जताई आशंका
31 में से 13 मशीनों की सप्लाई, बाकी प्रक्रिया जारी

बिलासपुर के सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में अव्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य शासन और स्वास्थ्य विभाग पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि सभी व्यवस्थाएं कागजों में इतनी ही बेहतर होतीं, तो मामला अदालत तक पहुंचता ही नहीं।

सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की ओर से पेश शपथ पत्र पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। बेंच ने शपथ पत्र में एक जैसी भाषा और बिंदुओं की पुनरावृत्ति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दस्तावेज एआई द्वारा तैयार किया गया प्रतीत होता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि शासन या विभाग जमीनी हकीकत छिपाकर न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश न करें। इससे पहले कोर्ट कमिश्नर ने भी शपथ पत्र के एआई आधारित होने की आशंका जताई थी।

इस मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) की ओर से भी शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें सिम्स के लिए आवश्यक उपकरणों और मशीनों की खरीदी की स्थिति का विस्तृत चार्ट प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार सिम्स के लिए कुल 31 अत्याधुनिक मशीनों की खरीदी का टेंडर जारी किया गया है, जिनमें से अब तक 13 मशीनों की सप्लाई की जा चुकी है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दो मशीनों के लिए जून माह में ही परचेज ऑर्डर जारी किया जा चुका है, जबकि दो अन्य मशीनों के अधिक मूल्य को लेकर सिम्स से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है और जल्द ही उनके ऑर्डर जारी किए जाएंगे। इसके अलावा दो मशीनें तकनीकी प्रदर्शन के दौर में हैं, जिनके पास होते ही फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। वहीं, दो मशीनों के टेंडर का मूल्यांकन जारी है और शेष 6 मशीनों के लिए 9 जुलाई को बिड खोली जानी है।

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