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बिजली बिल विवाद ने लिया तूल, सहायक यंत्री को धमकाने और गाली-गलौज का आरोप, मामला दर्ज…

हेडलाइंस

रायपुर। राजधानी रायपुर में बिजली बिल को लेकर हुए विवाद का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। बिजली विभाग के एक सहायक यंत्री ने उपभोक्ता पर गाली-गलौज करने, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने और मारपीट की धमकी देने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कार्यालय में बिल जांच के दौरान हुआ विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार शास्त्री चौक जोन स्थित सहायक अभियंता कार्यालय में पदस्थ सहायक यंत्री मुकेश त्रिपाठी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 24 जून 2026 की रात लगभग 8 बजे वे कार्यालय में अंतिम बिजली बिलों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान अरुण भद्रा नामक व्यक्ति कार्यालय पहुंचा और अपने बिजली बिल को लेकर आपत्ति जताने लगा। उसने आरोप लगाया कि उसके मीटर की गलत रीडिंग दर्ज की गई है तथा बिना उचित कारण उसके बिजली कनेक्शन को काट दिया गया है।

रीडिंग दिखाने के बाद भी नहीं माना उपभोक्ता

शिकायत के अनुसार सहायक यंत्री ने विभाग के प्रकाश एप के माध्यम से संबंधित उपभोक्ता के बिजली मीटर की रीडिंग और बिल संबंधी जानकारी दिखाकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। हालांकि आरोप है कि जानकारी दिखाए जाने के बाद भी उपभोक्ता शांत नहीं हुआ और उसने कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया।

खुद को नेता बताकर धमकी देने का आरोप

बिजली विभाग के कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्ति ने स्वयं को प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति बताते हुए 20 से 25 लोगों को बुलाकर पिटाई कराने की धमकी दी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कार्यालय में मौजूद ऑपरेटर मनीष खेंदूलकर को भी कथित रूप से अपशब्द कहे गए और भविष्य में देख लेने की धमकी दी गई। घटना के समय कार्यालय में कनिष्ठ यंत्री योगेश साहू, कुणाल दीप तथा अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

सिविल लाइन थाना पुलिस ने प्राप्त शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, गाली-गलौज करने और धमकी देने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी लिए जा रहे हैं।

शासकीय कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल

घटना के बाद विभागीय कर्मचारियों में चिंता का माहौल है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद का समाधान निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। शासकीय कार्यालयों में कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार और धमकी जैसी घटनाएं प्रशासनिक कार्यप्रणाली को प्रभावित करती हैं तथा कानून के दायरे में आती हैं।

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