तेहरान / वाशिंगटन
प्रमुख बिंदु
- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी।
- डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेबनान में समर्थन बंद करने की चेतावनी दी।
- ईरानी संसद अध्यक्ष ने अमेरिकी बयान को ‘हताशा’ करार दिया।
- स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर संपन्न।
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति प्रक्रिया के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह लेबनान में अपने समर्थक समूहों को आर्थिक सहायता देना बंद नहीं करता है तो अमेरिका दोबारा कठोर सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा कि ईरान ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर उसकी सेनाएं जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अमेरिकी बयानों को निराशा का संकेत बताते हुए संयम बरतने की सलाह दी।
इस बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक वार्ता का पहला दौर पूरा हो चुका है। रिपोर्टों के अनुसार बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और पश्चिम एशिया में तनाव कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बैठक में संबंधों को नई दिशा देने की इच्छा जताई। हालांकि तकनीकी वार्ताएं जारी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के नेताओं के ताजा बयानों ने यह संकेत दिया है कि शांति प्रक्रिया अभी भी कई संवेदनशील चुनौतियों से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब आगामी दौर की बातचीत पर टिकी हुई हैं।
खबरें और भी…
हमारे WhatsApp ग्रुप को फॉलो करना न भूलें
https://chat.whatsapp.com/BbNFAy9gDg1E4s1kHkjJrG

