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पेट्रोल-डीजल को मिलेगी चुनौती! डेढ़ से दो महीने में सड़कों पर दौड़ेंगी इथेनॉल से चलने वाली कारें: गडकरी

नई दिल्ली

केंद्रीय मंत्री ने कहा- वैकल्पिक ईंधन की दिशा में देश तेजी से बढ़ रहा, इथेनॉल आधारित वाहनों को मिलेगा बढ़ावा
हेडलाइंस

नई दिल्ली। देश में स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम जल्द देखने को मिल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि आने वाले डेढ़ से दो महीने के भीतर इथेनॉल से चलने वाली कारें बाजार में उपलब्ध हो सकती हैं। उनका कहना है कि यह पहल न केवल पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर

नितिन गडकरी लंबे समय से इथेनॉल, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि देश में बड़े पैमाने पर जैव ईंधन के उपयोग से आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद

इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। ऐसे में इथेनॉल आधारित ईंधन की मांग बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैव ईंधन क्षेत्र के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।

पर्यावरण के लिए भी होगा लाभकारी

इथेनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है। सरकार लगातार ऐसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही है, जो प्रदूषण कम करने के साथ-साथ टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित करने में सहायक हों। इथेनॉल से चलने वाले वाहनों के आने से इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद की जा रही है।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आ सकता है बड़ा बदलाव

यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर इथेनॉल आधारित कारें बाजार में आती हैं तो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। इससे उपभोक्ताओं को ईंधन के अधिक विकल्प मिलेंगे और भविष्य में परिवहन लागत को कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उद्योग जगत और वाहन उपभोक्ताओं की नजर अब इस नई तकनीक पर टिकी हुई है।

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