Site icon स्वतंत्र छत्तीसगढ़

बीमा कंपनी को उपभोक्ता आयोग का बड़ा झटका, क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, 28 लाख से अधिक राशि चुकाने का आदेश…

हेडलाइंस

बिलासपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा दावे को खारिज करने के मामले में बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने माना कि पर्याप्त तकनीकी साक्ष्यों के अभाव में बीमा क्लेम अस्वीकार करना उचित नहीं था। इसके साथ ही आयोग ने बीमा कंपनी को परिवादी को 28.24 लाख रुपए से अधिक की राशि ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। आदेश में डेढ़ महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आग लगने से हुई थी करोड़ों की मशीन को क्षति

मामला कोरबा निवासी ए.के. शर्मा से जुड़ा है, जिनकी वोल्वो क्राउलर एक्सीवेटर मशीन 7 अगस्त 2021 को एसईसीएल की बिजारी खदान में कार्य के दौरान आग लगने से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी। मशीन का बीमा ‘कॉन्ट्रैक्ट प्लांट एंड मशीनरी पॉलिसी’ के तहत कराया गया था। घटना के बाद मशीन की मरम्मत पर हुए खर्च के लिए परिवादी ने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया था।

सर्वे रिपोर्ट में शॉर्ट सर्किट को बताया गया आग का कारण

घटना की जांच के लिए नियुक्त सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि मशीन के कंट्रोल पैनल में हुए इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। रिपोर्ट में इसे एक आकस्मिक दुर्घटना माना गया। परिवादी ने मशीन की मरम्मत में लगभग 46.41 लाख रुपए खर्च होने का दावा करते हुए बीमा राशि की मांग की थी।

ऑपरेटर की लापरवाही का हवाला देकर खारिज किया गया दावा

बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि मशीन का ऑपरेटर उसे चालू अवस्था में छोड़कर चला गया था, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना गया। इसी आधार पर कंपनी ने बीमा क्लेम का भुगतान करने से इनकार कर दिया। हालांकि आयोग ने सुनवाई के दौरान इस दलील की गहन समीक्षा की।

ऑटो-कट तकनीक ने बदला मामले का रुख

आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने पाया कि संबंधित मशीन में ऑटो-कट तकनीक उपलब्ध थी। इस तकनीक के अनुसार चाबी बंद किए जाने के तीन मिनट बाद मशीन स्वतः बंद हो जाती है। आयोग ने माना कि ऐसी स्थिति में ऑपरेटर की लापरवाही सिद्ध नहीं होती। साथ ही बीमा कंपनी यह भी साबित नहीं कर सकी कि घटना जानबूझकर की गई लापरवाही का परिणाम थी।

क्षतिपूर्ति, मानसिक प्रताड़ना और ब्याज देने के निर्देश

आयोग ने अपने आदेश में बीमा कंपनी को मशीन की क्षति के लिए 27.94 लाख रुपए, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपए भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस तकनीकी आधार के बीमा दावा खारिज करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में अहम फैसला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है, जिनके वैध बीमा दावे तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों का हवाला देकर अस्वीकार कर दिए जाते हैं। आयोग का यह निर्णय बीमा कंपनियों को दावों के निपटारे में पारदर्शिता और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने का संदेश भी देता है।

ख़बरें और भी…

स्वतंत्र छत्तीसगढ़ के व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करना न भूलें :
https://chat.whatsapp.com/BbNFAy9gDg1E4s1kHkjJrG

Exit mobile version