रायपुर / छत्तीसगढ़
संस्कृति शिविर में नवाचार की मिसाल, सिपोरेक्स और थर्माकोल से बनीं आकर्षक कलाकृतियां।
मुख्य बिंदु:
अनुपयोगी सामग्री से बनाई गईं कलात्मक संरचनाएं
बोनसाई कला के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश
80 से अधिक प्रशिक्षार्थियों ने लिया प्रशिक्षण
कम लागत में सजावट और स्वरोजगार की नई संभावनाएं
रायपुर, 11 जून 2026 छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ इस वर्ष रचनात्मकता और नवाचार का अनूठा संगम बनकर उभरा। शिविर में पारंपरिक कलाओं के साथ-साथ आधुनिक प्रयोगों को भी शामिल किया गया, जिसमें बोनसाई कला के अंतर्गत सिपोरेक्स ब्लॉक्स और थर्माकोल जैसे अनुपयोगी पदार्थों से आकर्षक कलाकृतियां तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। इस पहल ने प्रतिभागियों को कला के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया।
अपशिष्ट से सृजन की अनूठी पहल
शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने फेंक दी जाने वाली सामग्री को नए रूप में ढालने का अभ्यास किया। सिपोरेक्स ब्लॉक्स और थर्माकोल के टुकड़ों से गमले, पहाड़, चट्टानें और सजावटी लैंडस्केप तैयार किए गए। इस प्रयोग ने यह साबित किया कि रचनात्मक सोच से बेकार वस्तुएं भी उपयोगी और आकर्षक बन सकती हैं।
विशेषज्ञों ने सिखाई बारीकियां
प्रशिक्षण सत्रों का संचालन बोनसाई विशेषज्ञ डॉ. मनोज अग्रवाल द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को सामग्री चयन, डिजाइन निर्माण, आकार निर्धारण और रंग-सज्जा की तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही, बोनसाई प्रदर्शन के लिए उपयुक्त लैंडस्केप तैयार करने की बारीकियां भी सिखाई गईं, जिससे प्रतिभागियों का कौशल और निखरकर सामने आया।
युवाओं में दिखा उत्साह और रुचि
शिविर में लगभग 80 प्रशिक्षार्थियों ने भाग लिया। युवा कलाकारों से लेकर वरिष्ठ कला प्रेमियों तक सभी ने पूरे उत्साह के साथ इस कला को सीखा। प्रशिक्षण के अंतिम दिनों में तैयार कलाकृतियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया और प्रतिभागियों ने इसे सबसे रोचक गतिविधियों में से एक बताया।
रचनात्मकता से स्वरोजगार की राह
प्रशिक्षार्थियों का मानना है कि यह कला न केवल सौंदर्यबोध को विकसित करती है, बल्कि कम लागत में घर और सार्वजनिक स्थलों को सजाने का बेहतर विकल्प भी प्रदान करती है। साथ ही, यह भविष्य में स्वरोजगार और रचनात्मक उद्यमिता के नए अवसर खोल सकती है।
शिविर का सफल समापन
25 मई से 9 जून 2026 तक आयोजित इस शिविर में चित्रकला, मूर्तिकला और लोक कलाओं सहित कई विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें सिपोरेक्स और थर्माकोल से बनी संरचनाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। यह नवाचार कला के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने वाला साबित हुआ।
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