स्वतंत्र छत्तीसगढ़
हेडलाइंस
- बिलासपुर पुलिस ने तेज रफ्तार और लापरवाह वाहन चालकों पर शिकंजा कसने की तैयारी की।
- पुलिसकर्मियों को आईटीएमएस और एम-परिवहन ऐप का दिया गया प्रशिक्षण।
- बॉडी वॉर्न कैमरे और अपडेटेड पीओएस मशीनों का होगा उपयोग।
- सड़क सुरक्षा के लिए ‘ट्रिपल-ई’ फॉर्मूले पर करेगी काम पुलिस।
- सात प्रमुख यातायात उल्लंघनों पर विशेष निगरानी और कार्रवाई।
बिलासपुर। शहर में बढ़ते सड़क हादसों और यातायात नियमों की अनदेखी को देखते हुए बिलासपुर पुलिस ने अब सख्त रुख अपनाया है। सड़कों पर मनमर्जी से वाहन चलाने वाले और तेज रफ्तार से अपनी तथा दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले वाहन चालकों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस ‘विजिबल पुलिसिंग’ की रणनीति पर काम करेगी, जिससे सड़क पर पुलिस की मौजूदगी और निगरानी दोनों बढ़ेंगी।
आधुनिक तकनीक से लैस होंगे पुलिसकर्मी
शनिवार को आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों और जवानों को अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग की जानकारी दी गई। अब यातायात ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मी इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) और नेक्स्ट जेन एम-परिवहन ऐप का उपयोग करेंगे। इसके साथ ही उन्हें बॉडी वॉर्न कैमरे के उन्नत संस्करण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे कार्रवाई के दौरान पारदर्शिता बनी रहेगी और विवाद की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध रहेंगे।
मौके पर ही होगा डिजिटल चालान
यातायात व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पीओएस मशीनों को भी अपडेट किया गया है। इन मशीनों की सहायता से पुलिसकर्मी मौके पर ही डिजिटल चालान जारी कर सकेंगे। इससे कार्रवाई में तेजी आएगी और यातायात नियमों के उल्लंघन करने वालों पर तत्काल जुर्माना लगाया जा सकेगा।
सड़क सुरक्षा पर समझौता नहीं
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे भी उपस्थित रहे।
‘ट्रिपल-ई’ फॉर्मूले से सुधरेगी व्यवस्था
यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस ‘ट्रिपल-ई’ मॉडल पर कार्य करेगी। इसमें एजुकेशन, इंजीनियरिंग और एनफोर्समेंट को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा, सड़कों की संरचनात्मक कमियों को चिन्हित कर सुधार के प्रयास होंगे और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन उल्लंघनों पर रहेगी विशेष नजर
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शराब पीकर वाहन चलाने, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाने, सिग्नल जंप करने, बिना हेलमेट वाहन चलाने, बिना सीट बेल्ट यात्रा करने और मालवाहक वाहनों में सवारी बैठाने जैसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। इसके अलावा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग और संदिग्ध वाहनों की जांच के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा।
सुरक्षित यातायात के लिए जनभागीदारी जरूरी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केवल कार्रवाई से यातायात व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि नागरिकों की सहभागिता और जागरूकता भी आवश्यक है। यदि लोग स्वयं नियमों का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।
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